
आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों से छीन गया निवाला
हिमांशु धवल
. अजमेर. प्रदेश में आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को दिए जाने वाले नाश्ते और पोषाहार के मैन्यू बदलने के बाद से अधिकांश केन्द्रों पर पोषाहार का वितरण बंद हो गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्री-स्कूल एज्युकेशन दी जाती है। यहां पर बच्चों को नाश्ता और गर्म पोषाहार दिया जाता है। नाश्ते के लिए 3.50 रुपए और गर्म पोषाहार के लिए 4.50 रुपए निर्धारित है। केन्द्रों पर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से नाश्ता और पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है। सरकार ने 15 फरवरी से नाश्ते और गर्म पोषाहार के मैन्यू में बदलाव कर दिया, लेकिन देय राशि नहीं बढ़ाई गई। जिले की अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषाहार का वितरण बंद हो गया है।
केस 1
तोपदड़ा स्थित नंद केन्द्र में 25 में से 16 बच्चे उपस्थित मिले। बच्चे टीवी के माध्यम से कहानियां देख रहे थे। कार्यकर्ता कलावती ने बताया कि पोषाहार 15 फरवरी से बंद है। उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
केस 2
महात्मा गांधी स्कूल में आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है। वर्तमान में परीक्षाओं के चलते इन्हें पास के नोहरे में खुले आसमान के नीचे शिफ्ट कर रखा है। कार्यकर्ता संतोषदेवी ने बताया कि पोषाहार का वितरण नहीं हो रहा है।
केस 3 राजा साइकिल पेट्रोल पंप के पास जादूघर द्वितीय आंगनबाड़ी केन्द्र में 11 में से 8 बच्चे उपस्थित मिले। बच्चों को कार्यकर्ता कविता सुना रही थी। कार्यकर्ता संतोष सुजैनिया ने बताया कि केन्द्र पर बच्चों को पोषाहार नहीं वितरित किया जा रहा है।
फैक्ट फाइल
- 1968 आंगनबाड़ी केन्द्र जिले में स्वीकृत
- 1964 आंगनाबाड़ी केन्द्र जिले में संचालित
- 35 हजार से अधिक बच्चे आंगनबाड़ी केन्द्रों में
पुराना मैन्यू : नाश्ता व गर्म पोषाहार
केन्द्रों पर बच्चों को सोमवार से गुरुवार तक मुरमुरे व गुड़-चना, मंगलवार व शुक्रवार को गुड़ चना दिया जाता था। इसी प्रकार बुधवार व शनिवार को हलवा देते थे। गर्म पोषाहार में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को खिचड़ी, मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को दलिया दिया जाता था।
नया मैन्यू : नाश्ता व पोषाहार मैन्यू
केन्द्र पर नए मैन्यू के अनुसार सोमवार को नाश्ता, पका केला/ मौसमी व गरम पोषाहार मीठा दलिया, मंगलवार को पका केला/ मौसमी व रोटी सब्जी-दाल दिया जाना है। बुधवार को दूध 100 एमएल व खिचड़ी, गुरुवार को गर्मी में बेसन / सदी में तिल का लड्डू एवं चावल, चनादाल -लौकी, शुक्रवार को मुरमुरे/पोहा/नींबू टमाटर के साथ व बाजरे का खिचड़ा/कढ़ी-चावल व अंकुरित/उबली साबुत दाले व खिचड़ी दी जानी है।
इनका कहना है...
आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषाहार नहीं बांटा जा रहा है तो यह गंभीर है। ऐसा मेरी जानकारी में नहीं है। बच्चा रोज खिचड़ी-दलिया नहीं खा सकता है। समय के साथ बदलाव आवश्यक है। इसके कारण ही मैन्यू में कुछ बदलाव किया गया है। कुछ चीजें समय के साथ सस्ती भी होती है। संगठनों से बातचीत की है। आगामी दिनों में बड़े परिवर्तन प्रकियाधीन है।
- डॉ. के. के. पाठक, सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग जयपुर
Published on:
08 Mar 2020 05:09 pm
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