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मलेरिया नियंत्रण पर अब मच्छरदानी का जाल

नए साल में अच्छी पहल : प्रदेश में 22 लाख से अधिक मच्छरदानी बांटी जाएगी, गर्भवती महिलाएं, 5 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिकता, मलेरिया रोग के उपचार पर नहीं अब रोकथाम पर केन्द्र सरकार का फोकस

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मलेरिया नियंत्रण पर अब मच्छरदानी का जाल

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चन्द्र प्रकाश जोशी.

अजमेर. मलेरिया नियंत्रण के लिए अब केमिकलयुक्त मच्छरदानियां प्रदेशभर में प्रभावित क्षेत्रों में वितरण की जाएगी। मलेरिया रोग के उपचार, नियंत्रण पर होने वाले खर्च को कम करने के साथ मलेरिया रोग को धरातल पर ही रोकने के लिए प्रदेशभर में करीब 22 लाख 17 हजार से अधिक मच्छरदानियों का वितरण किया जाएगा। इनमें भी गर्भवती एवं 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों पर फोकस किया गया है।

केन्द्र सरकार के राष्ट्रीय वेक्टरजनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत राज्य सरकार एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ विभाग की ओर से प्रदेशभर के ऐसे शहरी, ग्रामीण क्षेत्र जहां पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक मलेरिया रोगी चिह्नित हुए हैं, वहां केमिकलयुक्त मच्छरदानी बांटी जाएगी। मच्छरदानी के उपयोग के लिए ना केवल पाबंद किया जाएगा बल्कि उपयोग के तरीके भी बताए जाएंगे। मच्छरदानियां तीन साइज में है जो सिंगल, डबल के साथ लार्ज आकार में है। फिलहाल सीकर, जयपुर, करौली, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, झालावाड़ व टोंक जिला को इससे मुक्त रखा गया है।
यह है सरकार का मकसद

डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन के अनुसार मलरिया के उपचार की तुलना में मलेरिया नियंत्रण का बेहद सस्ता तथा प्रभावी उपाय घरों में दवाई का छिड़काव एवं मच्छरदानियों का उपयोग को उचित माना गया है। मच्छरदानी वितरण का मकसद मानव व मच्छर का सम्पर्क रोकना है।


इन जिलों में सर्वाधिक मच्छरदानीजिला मच्छरदानी

उदयपुर 3.59, 750
डूंगरपुर 3,48. 350

चूरू 3,22,900
अजमेर में तीन लाख जनसंख्या पर फोकस

अजमेर जिले में 2 लाख 98 हजार 163 जनसंख्या के लिए 1 लाख 50 हजार 800 मच्छरदानियों का वितरण किया जाएगा। अजमेर के जेएलएन मेडिकल कॉलेज/अस्पताल में जहां 500 मच्छरदानी उपलब्ध करवाई जाएगी वहीं जिला चिकित्सालय केकड़ी, ब्यावर, सैटेलाइट तथा किशनगढ़, नसीराबाद, पुष्कर सहित चार पीएमओ स्तर के चिकित्सालय में 100-100 मच्छरदानी दी जाएगी।

इनका कहना है

मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में साल-दर-साल आ रहे मलेरिया रोकने के लिए सरकार की ओर से मानव व मच्छर का संपर्क रोकने के लिए केमिकल युक्त मच्छ्रदानी का वितरण किया जा रहा है। चिकित्सा संस्थानों को भी यह उपलब्ध करवाई जाएगी।
-डॉ. के.के.सोनी, सीएमएचओ