
दोस्ती की जमीन पर रंजिश की कीलें और कत्ल के ताबूत!...पढ़े अजमेर के भूमाफिया राज की फिल्मी कहानी
मनीष कुमार सिंह
अजमेर. शहर के भू-कारोबार में बरसते पैसे ने पहले इस कारोबार में माफिया की एंट्री करवाई और दो दशक पहले शुरू हुई दोस्ती कारोबार के साथ दोस्तों की महत्वाकांक्षाओं को भी बढ़ाने लगी। बात इतनी बढ़ी कि कुछ समय बाद दोस्त ही एक-दूसरे से होड़ करने लगे और देखते ही देखते दुश्मन बन बैठे। दुश्मनी भी ऐसी कि मुकाबले को गैंग बन गईं और सरगना सहित गुर्गे खूंरेजी पर उतर आए। करीब दस साल पहले पुष्कर रोड विश्रामस्थली के सामने हुई शुरुआत ने शहर में दोनों गिरोह को आमने-सामने कर दिया। दोनों गुट फिल्मी अंदाज में मौका देख एक-दूसरे पर गोलियां बरसाते रहे। नतीजतन हिस्ट्रीशीटर धर्मेन्द्र चौधरी व रामकेश मीणा के बाद बुधवार रात भू-माफिया विक्रम शर्मा की भी मौत गोली से हुई।
बी.के. कौल नगर में बुधवार रात विक्रम शर्मा की हत्या के मौका-ए-वारदात से महज एक किलोमीटर के फासले पर ही दस साल पहले दुश्मनी की पहली इबारत पुलिस के बर्खास्त सिपाही और हिस्ट्रीशीटर धर्मेन्द्र चौधरी के भतीजे वरूण चौधरी ने लिखी थी। वरूण ने पुष्कर रोड विश्रामस्थली के निकट प्रोपर्टी की खरीद-फरोख्त में उपजे विवाद में विक्रम शर्मा पर जानलेवा हमला किया। जिसमें घायल विक्रम को ठीक होने में सालों लग गए।
गैंग तोड़ी, गुर्गों को मिलाया
जानलेवा हमले के बावजूद विक्रम ने कुछ साल बाद भू-कारोबार में वापसी की, लेकिन उसने पहले वरुण के चाचा धर्मेन्द्र चौधरी की गैंग को तोड़ा। विक्रम ने धर्मेन्द्र के साथी रहे रामकेश मीणा व संजय मीणा को अपने साथ मिला लिया। वरुण ने प्रोपर्टी की खरीद- फरोख्त में अड़चने पैदा करना शुरू कर दिया। शर्मा ने पलटवार करते हुए अजमेर क्लब के सामने स्थित जमीन के विवाद में दाखिल होकर धर्मेन्द्र चौधरी के भतीजे वरूण चौधरी पर हमला किया। शर्मा व उसके गिरोह ने वरूण पर ताबड़तोड़ फायर किए। वारदात में वरुण तो बच गया लेकिन उसका पैर हमेशा के लिए खराब हो गया।
. . . फिर इनडोर स्टेडियम पर वारदात
शहर में भू-माफिया के बीच उपजी अदावत ने 10 नवम्बर 2016 को फिर से खूनी खेल दिखाया। इनडोर स्टेडियम से बैडमिंटन खेलकर बाहर निकल रहे हिस्ट्रीशीटर धर्मेन्द्र चौधरी पर कभी उसके गिरोह में रहे संजय मीणा और उसके साथियों ने फायर करने के बाद बेसबॉल के डंडे से हमला कर दिया। धर्मेन्द्र चौधरी ने बचकर भागने का प्रयास किया लेकिन संजय और उसके साथियों ने उसे मेडिकल कॉलेज चौराहे पर घेर कर मारा। मामले में संजय मीणा, विक्रम शर्मा समेत आधा दर्जन की गिरफ्तारी भी हुई। लेकिन विक्रम शर्मा प्रकरण में अदालत से बरी हो गया। इसके बाद संजय मीणा व उसका साथी शेरू भी जमानत पर रिहा हो गए।
श्रीनगर रोड पर रामकेश मीणा का कत्ल
दोनों गैंग के बीच उपजी अदावत का दूसरा निशाना बना संजय मीणा का साथी हिस्ट्रीशीटर रामकेश मीणा। धर्मेन्द्र की हत्या के करीब ढाई माह बाद 31 जनवरी 2017 को वरूण चौधरी गैंग ने चाचा की हत्या का बदला लेते हुए रामकेश मीणा की श्रीनगर रोड पर गोली मार कर हत्या कर दी। अलवर गेट थाना पुलिस ने प्रकरण में वरुण समेत 17 जने गिरफ्तार किए।
रिहाई के बाद फिर सक्रिय
धर्मेन्द्र चौधरी हत्याकांड में कोर्ट से राहत मिलने के बाद जहां विक्रम शर्मा और उसका साथी बरी हो गए, वहीं संजय मीणा और उसके साथी को कुछ माह पहले जमानत मिल गई। उधर वरूण चौधरी भी कुछ समय बाद ही रिहा हो गया। गैंग के सरगनाओं के बाहर निकलने के बाद फिर से शहर में गैंगवार की आशंका बन गई थी। मीणा ने कामकाज शुरू किया ही था कि पहले मामले ही मामले में अलवर गेट थाना पुलिस के हत्थे चढ़ गया। हालांकि मीणा परिवादी से राजीनामा करके अदालत से रिहा होने में कामयाब रहा।
शर्मा की हत्या के पीछे किसी की क्या वजह?
1-हिस्ट्रीशीटर वरूण चौधरी की विक्रम शर्मा से पुरानी अदावत के साथ चाचा धर्मेन्द्र चौधरी की हत्या का बदला अहम वजह है। हालांकि खुद वरूण चौधरी हमले की स्थिति में नहीं है लेकिन उसके गुर्गे अभी सक्रिय है। संभवत: हमलवार में अब तक जिन दो युवकों के नाम सामने आए हंै वो चौधरी गुट से ताल्लुक रखते हैं।
2-हिस्ट्रीशीटर संजय मीणा के विक्रम शर्मा से सिर्फ काम के बदले पैसों का रिश्ता था। जानकारों के मुताबिक धर्मेन्द्र चौधरी हत्याकांड में भी विक्रम शर्मा ने संजय मीणा को पर्याप्त पैसा नहीं दिया। जिससे संजय मीणा भू माफिया विक्रम शर्मा से भी नाराज था। विक्रम शर्मा की धर्मेन्द्र चौधरी की अदावत में उसके खास दोस्त रामकेश मीणा की जान चली गई।
Published on:
23 Jul 2020 07:00 am
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