3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ना राजस्व मंत्री परवाह की ना सरकार को जवाब पेश करने के लिए समय दिया अध्यक्ष व सदस्य ने

20 करोड़ की सरकारी जमीन के मामले में सरकार के खिलाफ सुनाया फैसला मालिकाना हक के आदेश दिए,सरकारी पक्ष की बहस भी नहीं सुनी पूरी राजस्व मंडल

2 min read
Google source verification
court news:

court news:

भूपेन्द्र सिंह

अजमेर. राजस्व मंडल में मनमाने ढंग से किस तरह सुनवाई और फैसले सुनाए जाते रहे इसका चौंकाने वाला उदाहरण है उदयपुर विकास न्यास की गिर्वा तहसील के सबीना गांव की 20 करोड़ रूपए मूल्य की सरकारी जमीन का मुकदमा। इस मामले मे न राजस्व मंत्री Revenue Minister की परवाह की गई और ना ही शिकायती पत्र को तवज्जो दी गई। न्यास के अधिवक्ता ने मुकदमे में करोड़ों रूपए की सरकारी जमीन होने से व्यापक जनहित का हवाला देते हुए जवाब के साथ शपथ पत्र पेश कर बहस करने के तीन दिन का वक्त मांगा था। लेकिन मंडल अध्यक्ष डॉ. आर.वैंकटेश्वरन Chairman और निलंबित सदस्य Member सुनील शर्मा ने न केवल इसे दरकिनार कर दिया बल्कि अंतिम बहस सुनकर फैसला भी सुरक्षित रख लिया। बाद में निर्णय उन लोगों के पक्ष में सुनाया गया जो निचली दो अदालतों में हारे हुए थे। राजस्व मंडल से ही उन्हें 10 बीघा 16 बिस्वा जमीन के मालिकाना हक के खातेदारी अधिकार दिए जाने के आदेश भी दे दिए गए। जबकि न्यास के अधिवक्ता अपनी बहस पूरी करने के लिए तीन दिन का समय ही मांगते रह गए।

राजस्व मंत्री को बताया था मामला

नगर विकास न्यास उदयपुर के सरकारी अधिवक्ता ने नगर विकास न्यास बनाम जेतू कंवर मामले में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को पत्र लिखकर गुहार लगाई। मामले की जानकारी देते हुए कहा कि व्यापक जनहित में राजस्व मंडल अध्यक्ष को निष्पक्ष न्यायिक निस्तारण के लिए मुकदमा खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए नियत किए जाने के आदेश दिए जाने की मांग की गई थी। लेकिन इसकी पालना नहीं की गई

अध्यक्ष को भी लिखा था पत्र

राजकीय अधिवक्ता ने नगर विकास न्यास बनाम जेतू कंवर प्रकरण में मंडल के अध्यक्ष और सदस्य सुनील शर्मा(अब निलंबित) की खंडपीठ के समक्ष मुकदमें की सुनवाई के दौरान ही प्रार्थना पेश कर मुकदमा न्यायिक सदस्य को भेजने की मांग की थी। जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद राजस्व मंडल अध्यक्ष को व्यक्तिगत पत्र लिखकर भी मुकदमे में जवाब पेश करने के लिए तीन दिन की मोहलत मांगी थी। साथ ही निष्पक्ष न्यायिक निस्तारण के लिए अन्य खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आज्ञा दिए जाने का आग्रह किया था। लेकिन इनका कोई असर नहीं हुआ।

read more: थोक में फैसले सुनाए, जमकर समेटा माल!

Story Loader