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आंगनबाड़ी के बच्चों को मिलेगा बाजरे का खिचड़ा, कढ़ी-चावल और गेहूं-मक्की का दलिया

पोषाहार की गुणवत्ता बढ़ाने व स्वादिष्ट आहार का निर्णय, कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के प्रयास,आंगनबाड़ी के बच्चों में बढ़ेगी रूचि,नई रेसिपी 15 फरवरी से होगी लागू

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आंगनबाड़ी के बच्चों को मिलेगा बाजरे का खिचड़ा, कढ़ी-चावल और गेहूं-मक्की का दलिया

आंगनबाड़ी के बच्चों को मिलेगा बाजरे का खिचड़ा, कढ़ी-चावल और गेहूं-मक्की का दलिया

अजमेर. राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार की गुणवत्ता बढ़ाने का निर्णय किया है। अब तक यहां साधारण नाश्ता दाल-चपाती,चावल,दलिया ही मिलता था, लेकिन अब मौसम के हिसाब से नाश्ते की व्यवस्था में वृद्धि की है। राजकीय विद्यालयों की तरह अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी पोषाहार की नई रेसिपी लागू हो जाएगी।

इसमें पूरक पोषाहर में मौसम के हिसाब से बाजरे का का खीचड़ा, मक्की व गेहूं का दलिया, कढ़ी चावल, रोटी सब्जी दाल आदि शामिल होंगे। गर्मियों में छाछ-दही,लापसी,सत्तू सहित अन्य की भी व्यवस्था रहेगी। इससे बालक-बालिकाओं को पौष्टिक आहार में वृद्धि होगी। नाश्ते और भोजन में विविधता आएगी।

15 फरवरी से नई रेसिपी होगी लागू

राज्य के समेकित बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर गरम पूरक पोषाहार के रूप में दलिया एवं खिचड़ी के साथ ही 15 फरवरी से नई रेसिपी लागू की जाएगी। इसके लिए नाश्ते में प्रति बालक-बालिका 3.5 रुपए और पोषाहार के लिए4.50 रुपए तय किया गया है। इसकी मात्रा भी तय है। अभी तक केवल मुरमुरे, पंजीरी, दलिया-खिचड़ी, भुने हुए चने-गुड़, हलवा ही शामिल था। अब सोमवार को नाश्ते में पका केला या मौसमी फल 60 ग्राम, गरम भोजन मीठा दलिया 140 ग्राम, मंगलवार को पका केला या मौसमी फल नाश्ते में, रोटी- सब्जी और दाल 120 ग्र्राम, बुधवार को नाश्ते में दूध 100 एमएल, पोषाहार में खिचड़ी 110 ग्राम दिया जाएगा। गुरुवार को तिल के लड्डू, गर्मी में बेसन के लड्डू मात्रा ५५ ग्राम, भोजन में चावल, चना दाल और लोकी मात्रा ७५ ग्राम रहेगी। शुक्रवार को नाश्ते में मुरमुरे/ पोहा (नींबू टमाटर) के साथ ४० ग्राम, बाजरे का खीचड़ा या कढ़ी चावल 95 ग्राम, शनिवार को अंकुरित या उबली साबुत दाले मूंग, मोठ, चना एवं मूंगफली 50 ग्राम, खिचड़ी आंवला चटनी या नींबू के साथ105 ग्राम रहेगी।

बच्चों की खानपान में बढ़ेगी रूचि

पोषाहार का रेसीपी बदलने से बच्चों की खानपान में रूचि बढ़ेगी और उनका पोषण का स्तर सुधरेगा। खानपान में विविधता होने से बच्चों की भूख भी जाग्रत होगी।

सब्जियों में भी विविधता आएगी

इस संबंध में विशेष निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसमें प्रत्येक नमकीन व्यंजन में आवश्यकतानुसार नींबू अवश्य डाला जाए, ताकि आयरन अवशोषण के लिए विटामिन-सी मिल कसे। सब्जियों में भी विविधता रखते हुए गाजर, चुकंदर, खीरा, ककड़ी आदि को सलाद के रूप में काम में लिया जा सकता है। सब्जी पकाने में रिफाइंड की बजाय सरसों या तिल का तेल काम में लेने को कहा गया है।

दाल एवं खिचड़ी में घी और जीरे की छोंक लगाना जरूरी होगा। लड्डू बनाने में शुद्ध घी का प्रयोग अवश्यक है। इसके अतिरिक्त तिल का तेल मिलाया जा सकता है। सब्जी बनाने में लोहे की कड़ाही का ही उपयोग में लाई जाएगी। गरम पूरक पोषाहार की रेसीपी को आंगनबाड़ी केंद्रों पर सूचना पट्ट पर प्रदर्शित किया जाए।