
कलौंजी
अनिल कैले
अजमेर. मसाला फसलों के उत्पादकों और व्यवसायियों को कलौंजी की नई किस्म के लिए एक साल और इंतजार करना पड़ेगा। वैसे तो नई किस्म की घोषणा इस महीने होनी थी पर कलौंजी पर चल रहे शोध को एक साल और बढ़ाया गया है। अब नई किस्म का उत्पादन अगले वर्ष अक्टूबर या नवम्बर से किया जा सकेगा।
अभी दो किस्में प्रचलन में
अजमेर के तबीजी स्थित राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र नाथ सक्सेना ने बताया कि फिलहाल केन्द्र की ओर से विकसित कलौंजी की दो किस्में अजमेर कलौंजी-1 और अजमेर कलौंजी-20 प्रचलन में हैं। इन किस्मों से काश्तकार एक हेक्टेयर में 10 से 12 क्विंटल कलौंजी का उत्पादन ले सकता है। इस बीजीय मसाले को उगाने में लागत बहुत कम आती है और आमदनी काफी अच्छी होती है।सक्सेना ने बताया कि एक हेक्टेयर में कलौंजी लगाने पर करीब 53000 रुपए का खर्च आता है। दस क्विंटल उत्पादन होने पर फसल का बाजार भाव करीब 1 लाख 80 हजार रुपए तक मिल जाता है। इस प्रकार एक हेक्टेयर से काश्तकार करीब 1 लाख 27 हजार रुपए कमा सकता है।
आठ वर्ष का लगता है समय
बीजीय मसालों की नई किस्म इजाद करने में सात से आठ वर्ष का समय लगता है। सक्सेना ने बताया कि देश में बीजीय मसालों पर 12 केन्द्र अनुसंधान करते हैं। कलौंजी पर आधा दर्जन संस्थान अनुसंधान कर रहे हैं। इनमें अजमेर के अतिरिक्त जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय, उदयपुर कृषि विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश में फैजाबाद स्थित कृषि विश्वविद्यालय, हरियाणा में हिसार और छत्तीसगढ़ में रायपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय शामिल हैं। प्रारम्भिक तौर पर सभी केन्द्र स्थानीय स्तर पर दस से बारह स्थानों पर नई किस्म उगाने का प्रयोग करते हैं। अपेक्षाकृत परिणाम आने पर श्रेष्ठ दो स्थानों के बीजों को समानांतर परिस्थिति वाले दो दूसरे स्थानों पर उगाया जाता है। उनकी कोडिंग (गुप्त नामकरण) की जाती है। दो से तीन वर्ष तक एक जैसी फसल मिलने पर नई किस्म विकसित करने का दावा किया जाता है। सभी अनुसंधान केन्द्रों से प्राप्त होने वाले दावों को केरल के कालीकट स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की मसाला इकाई परखती है और श्रेष्ठ बीज की घोषणा (डिकोडिंग) करती है।
अगले सप्ताह फैजाबाद में बैठक
कलौंजी पर अनुसंधान कर रहे सभी केन्द्रों के अधिकारियों की अगले सप्ताह फैजाबाद स्थित आचार्य नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय में बैठक हो रही है। 13 से 15 अक्टूबर तक होने वाली इस बैठक में डॉ. सक्सेना तबीजी केन्द्र में कलौंजी पर चल रहे अनुसंधान की प्रगति से अवगत करवाएंगे। बैठक में यह भी बताया जाएगा कि नई किस्म पुरानी किस्मों से किस प्रकार भिन्न रहेगी। इसमें नई किस्म की खुशबू, स्वाद, तेल के अंश, बीमारी प्रतिरोधक क्षमता आदि का विवरण दिया जाएगा।
Published on:
06 Oct 2022 01:07 pm
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