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दो जिलों में 11 साल से नहीं बना कोई राजस्व गांव

-इसी अवधि में 31 जिलों में बने 1822 राजस्व गांव राज्य में कुल 47 हजार 272

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ajmer news

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भूपेन्द्र सिंह

ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने तथा विकास के लिए राजस्व गांव को महत्वपूर्ण केन्द्र बिन्दु माना जाता है। पिछले 11 साल में राज्य में 33 जिलों में 1 हजार 8 सौ 22 नए राजस्व ग्राम बनाए गए हैं। राज्य का बाड़मेर ऐसा जिला है जहां इस दौरान 929 राजस्व गांव बनाए गए। जबकि हनुमानगढ़ में केवल 3 केवल और प्रतापगढ़ में केवल 4 ही राजस्व गांव बने। इस वर्ष जनवरी 2022 से मई 2022 तक राज्य के 11 जिले में 82 राजस्व गांव बनाए गए। इनमें भरतपुर के सर्वाधिक 14 राजस्व गांव हैंं।
यहां 11 साल से गांव से हुई दूरी
राज्य का कोटा व श्रीगंगा नगर ऐसे दो जिले हैं जो राजस्व गांवों से दूर हो रहे है। इन दोनो जिलों में पिछले 11 सालों में एक भी नया राजस्व गांव नहीं बन सका। हालांकि कोटा में 953 राजस्व गांव है जबकि श्रीगंगा नगर में राजस्व गांवो की संख्या 3060 है।
किस संभाग में कितने राजस्व गांव

राज्य के 33 जिलों में कुल 47 हजार 272 है। इनमें उदयपुर संभाग के 6 जिले में सर्वाधिक 8908 राजस्व गांव है। दूसरे नम्बर पर जोधपुर संभाग है यहां के 6 जिले में 8659 राजस्व गांव है। जयपुर संभाग के 5 जिले में 7934, बीकानेर संभाग में 6853, अजमेर संभाग में 6003, कोटा संभाग में 4740 राजस्व गांव हैं। भरतपुर संभाग में सबसे कम 4175 राजस्व गांव हैं। राज्य में सर्वाधिक 3405 राजस्व गांव बाडमेर जिले में है जबकि सबसे कम 520 सिराेही जिले में हैं। हालांकि अधिकतर राजस्व मंत्री जोधपुर संभाग व बाडमेर जिले से ही रहे हैं।
इसलिए जरूरी है राजस्व गांव
राजस्व ग्राम न केवल राजस्व प्रशासन की मूल इकाई है बल्कि विकास एंव आयोजना के लिए भी एक महत्वपूर्ण बिन्दू है। विभिन्न जन सुविधाओं एंव विकास योजनाओं जिनमें जल प्रदाय योजनाएं, विद्यालय, सड़क, चिकित्सा विद्वुतीकरण, डाकघर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि की स्वीकृति के लिए राजस्व ग्राम एक महत्वपूर्ण आधार बिन्दू है। राज्य मेें कहीं-कहीं पर आबादी मूल गांव से दूर अथवा बिखरी हुई ढाणियों में बसी है। विभिन्न विकास योजनाओं में सामान्यतया सुविधाएं राजस्व ग्राम की मुख्य आबादी में ही उपलब्ध करवाई जाती है। उसी राजस्व ग्राम में दूर बसी हुई आबादी अथवा बिखरी हुई ढाणियों में बसी आबादी अलग से राजस्व ग्राम घोषित नहीं होने के कारण विकास कार्यां से वंचित रह जाती है। अत: इन ढाणियों में बसे लोगों को भी विकास कार्यों का पूर्ण लाभ उपलब्ध कराने के लिए यह जरूरी है कि इस सुदूर बसी आबादी एंव बिखरी हुई ढाणियों को भी राजस्व ग्राम घोषित किया जाए।