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अजमेर
कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने करीब 50 कॉलेज शिक्षकों का शैक्षिक कार्य के लिए पदस्थापन किया है। यह शिक्षक एक महीने तक दूसरे कॉलेज में पढ़ाएंगे।
प्रदेश में सत्र 2018-19 में कई नए कॉलेज खुले हैं। इनके अलावा पिछले सत्र में भी कई कॉलेज खोले गए थे। इन कॉलेज में विषयवार शिक्षकों की कमी है। सभी कॉलेज में प्रवेश कार्य के अलावा पढ़ाई शुरू हो चुकी है। इसके चलते निदेशालय ने 50 कॉलेज के शिक्षकों को एक महीने से विभिन्न कॉलेज में पदस्थापित करने के आदेश दिए हैं। इनमें विभिन्न विषयों के शिक्षक शामिल हैं।
जिले के इन कॉलेज से जाएंगे शिक्षक
अजमेर: मसूदा कॉलेज (भूगोल, हिंदी, राजनीति विज्ञान)
किशनगढ़: अरांई कॉलेज (भूगोल, हिंदी, इतिहास)
नसीराबाद: आसींद कॉलेज (भूगोल, हिंदी)
ब्यावर: रायपुर कॉलेज (भूगोल, हिंदी)
ब्यावर: मारवाड़ जंक्शन कॉलेज (संस्कृत, इतिहास)
नेताओं के पैर छूने लगे दावेदार...
कॉलेज और विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव लडऩे वाले दावेदार और छात्रसंघ पदाधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है। चुनावी रणनीति को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। इसमें कांग्रेस और भाजपा नेताओं के अलावा छात्र संगठन और चुनाव लडऩे के इच्छुक प्रत्याशी शामिल हैं। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही यह सभी संस्थाओं के पैनल जारी करेंगे।
कॉलेज और विश्वविद्यालयों में अगस्त के दूसरे पखवाड़े में छात्रसंघ चुनाव होंगे। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव पद शामिल है। चुनाव में प्रमुख रूप रूप से एनएसयूआई और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है। कहीं-कहीं निर्दलीय प्रत्याशियों से भी दोनों संगठनों को करारी हार मिलती रही है। इस बार भी एनएसयूआई और एबीवीपी में ही सीधी टक्कर दिख रही है।
शुरू हुआ बैठकों का दौर
एनएसयूआई और एबीवीपी को क्रमश: कांग्रेस और भाजपा समर्थित माना जाता रहा है। छात्रसंघ चुनाव दोनों ही दलों के लिए अहम रहे हैं। इस बार तो विधानसभा चुनाव भी होने हैं। लिहाजा दोनों दलों के नेताओं और छात्रसंघ पदाधिकारियों की बैठक शुरू हो गई हैं। जहां एनएसयूआई के नए और पुराने जिलाध्यक्ष, कांग्रेस नेताओं की टिकट वितरण में अहम भूमिका रहेगी। इसी तरह एबीवीपी में भी प्रदेश अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री और भाजपा नेताओं का दखल रहेगा।
यह था पिछले साल का हाल
साल 2017 में हुए छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई ने सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, दयानंद कॉलेज, श्रमजीवी कॉलेज में अध्यक्ष पद जीता था। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में मनीष पूनिया निर्दलीय अध्यक्ष बने पर बाद में वे एनएसयूआई में शामिल हो गए थे। राजकीय कन्या महाविद्यालय, संस्कृत कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को एकतरफा जीत मिली थी। लॉ कॉलेज में चारों पदों पर निर्दलीय प्रत्याशी को विजय मिली थी। दोनों ही दलों को परस्पर टिकट वितरण में गलतियों और कई कारणों से नुकसान उठाना पड़ा था।
Published on:
28 Jul 2018 08:53 am
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