
अजमेर . राजघराने की रानियां कभी इस तरह से सबके सामने घूमर नहीं करती थी जैसे कपड़े पहन कर दीपिका डांस कर रही है। यह कहना है विश्व हिन्दू परिषद और दुर्गावाहिनी से जुडे नेताआें का उन्हाेनें फिल्म पद्मावती में चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी से जुड़े तथ्यों से छेड़छाड़ पर विरोध जताया है।
फिल्म में पद्मिनी को घूमर नृत्य करते दिखाया गया है, जबकि राजघराने की रानियां घूमर नहीं करती थीं।भंसाली अपने फायदे के लिए वीरांगनाओं और भारतीय महिलाओं का चरित्र गिराने की कोशिश में जुटे हैं। सेंसर बोर्ड को राजपूत समाज व अन्य पक्षों को शामिल कर तथ्यों की जांच करनी चाहिए। साथ ही मंत्रालय को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।
संगठन ने सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी को पत्र भेजा है। दुर्गावाहिनी की राष्ट्रीय संयोजक माला रावल और क्षेत्रीय संयोजक अभिलाषा यादव ने बताया कि रानी पद्मिनी सबके लिए प्रेरणादायी और शक्ति स्वरूप है। निर्देशक संजय लीला भंसाली ने गलत तरीके से रानी पद्मिनी को फिल्म में अलाउद्दीन की प्रेमिका बताया है। यह निराधार और इतिहास से परे है।
फिल्म पद्मावती में इतिहास को कथित तौर पर तोड़-मरोड़ कर पेश करने के मामले में सरकार को हस्तक्षेप करने की जरूरत है।
भाजपा नेता धर्मेश जैन ने बयान जारी कर बताया कि राजस्थान की पहचान मेवाड़ से है। निर्देशक भंसाली सदैव ही फिल्मों में इस प्रकार के विवाद करते रहे हैं। जैन ने कहा कि गृहमंत्री जो मेवाड़ से ही हैं उनकी अध्यक्षता में कमेटी बनाकर फिल्म के प्रिंट की प्रति मंगवाकर उसे देखना चाहिए। देशभर में राजस्थान की छवि को धूमिल नहीं होनी चाहिए।
जैसे जैसे फिल्म रीलिज की तारीख नजदीक आ रही है वैसे वैसे प्रदेश भर में सभी समुदाय के लोगों का विरोध प्रदर्शन बढ़ता ही जा रहा है, एेसे में असमंजस की स्थिति यह है कि फिल्म १ दिसम्बर को सिनेमाघरों में प्रसारित होगी या नहीं। जैसा कि यूपी सरकार ने फिलहाल पद्मावती पर १ दिसम्बर को सिनेमाघरों में प्रसारित होने पर रोक लगा दी है वैसी स्थिति कहीं राजस्थान में भी ना हो जाए।
Updated on:
18 Nov 2017 02:45 pm
Published on:
18 Nov 2017 01:52 pm
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