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Guest writer : parents ना बनाए बच्चों पर पढ़ाई का दबाव, अपनी मेहनत से ही वो कर सकेंगे मुकाम हासिल

  हर मां बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़ाई में अव्वल रहकर अच्छे अंक प्राप्त कर उनका नाम रोशन करे

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parents not have to pressurise their kids for study

Guest writer : ना बनाए बच्चों पर पढ़ाई का दबाव, अपनी मेहनत से ही वो कर सकेंगे मुकाम हासिल

अजमेर. हर मां बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़ाई में अव्वल रहकर अच्छे अंक प्राप्त कर उनका नाम रोशन करे, इसी तरह हर बच्चा भी माता-पिता की तरह अपने लिए सपने बुनकर एक लक्ष्य निर्धारित करके उसे पाने के लिए जी जान से मेहनत करता है। इसके बावजूद भी कई बार किन्हीं कारणों से लक्ष्य को हासिल करने में पीछे रह जाता है। ऐसे में बच्चों को चाहिए कि धैर्य रखकर हार नहीं मानें और फिर से मेहनत व लगन से प्रयास करें।

आजकल स्थिति विपरीत हो गई हैं, जैसे ही विभिन्न परिक्षाओं जैसे नीट, जेईई एम्स, सीबीएसई व आरबीएसई जैसे कई ऐसे परीक्षा परिणाम हैं जो कि स्टूडेंट्स में खुशी व निराशा जैसी कई मिश्रित भावनाओं को जन्म देते हैं। जो इस तरह की परीक्षाओं को पास कर लेता है वे खुद को भाग्यशाली तथा जो नहीं कर पाते वे निराश हो जाते हैं। ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि हमारे देश में नौकरी बाजार की वास्तविकता को जानें, हर वर्ष शिक्षित बेरोजगारी दर 9.4 प्रतिशत है जिसमें से डेढ़ करोड़ स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग परीक्षा पास करते हैं जिनमें से अस्सी प्रतिशत विद्यार्थी बेरोजगार हैं।

इसके साथ ही केवल पच्चीस प्रतिशत विद्यार्थियों को ही निजी कम्पनियों में नौकरी मिल पाती है। इसमें से भी एफआईसीसीआई की रिपोर्ट के अनुसार 64 प्रतिशत अभ्यर्थी इस नौकरी से संतुष्ट नहीं होते हैं। इसके साथ ही एचआरपी रिपोर्ट के अनुसार आठ करोड़ श्रमिकों में शामिल होने के लिए केवल 10 से 15 लाख को नौकरियां मिली हैं। बच्चों के कमजोर प्रदर्शन का एकमात्र कारण है माता-पिता की बच्चों से अपेक्षाएं और नौकरी की चकाचौंध जिसके कारण बच्चे गलत करिय्ॉर निर्धारित करने का फैसला ले लेते हैं।

अधिकतर देखा जाता है बच्चों व युवाओं की मानसिक स्थिति और दुविधा उनके परीक्षा परिणाम आने के साथ बढ़ जाती है जिसका एकमात्र कारण है माता-पिता का बच्चों पर दबाव जिसके चलते माता-पिता अपने लक्ष्यों व उम्मीदों को अपने बच्चों पर थोप कर अपनी पसंद के विषय जो कि बच्चों की योग्यता, व उनकी रुचि के नहीं होते हैं, ऐसे में बच्चे जब सफल नहीं हो पाते तो अपनी नाकाम होने की वजह वो माता-पिता को समझते हैं।

हम सभी को ये समझना होगा की जो भी हम अपने बच्चों को कहते हैं या जैसा व्यवहार हम उनके साथ करते हैं इसका बच्चों के दिमाग व उनके आत्म सम्मान के साथ ही उनकी सफलता पर गहरा असर होता है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे कभी अपने बच्चे की किसी अन्य बच्चे से तुलना नहीं करें। साथ ही उन पर टिप्पणी करने की बजाय उनकी मेहनत व लगन की तारीफ भी करनी चाहिए। किसी भी तरह का तनाव होने पर उन्हें परामर्श देने के साथ ही कभी बच्चों को कम नम्बर आने पर डांटें व धमकाएं नहीं। बच्चे क्या चाहते हैं उन्हें क्या बनना है एक बार उनकी जरूर सुनें।- ध्वनी मिश्रा