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व्यापार-नौकरी में भागीदारी, समाजसेवा में भी अग्रणी सिंधी समाज की महिलाएं

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अजमेर

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Amit Kakra

Mar 16, 2023

व्यापार-नौकरी में भागीदारी, समाजसेवा में भी अग्रणी सिंधी समाज की महिलाएं

व्यापार-नौकरी में भागीदारी, समाजसेवा में भी अग्रणी सिंधी समाज की महिलाएं

अजमेर. पहले चेटीचंड के जुलूस में महिलाओं की भागीदारी नहीं होती थी। लेकिन वक्त के साथ सिंधी समुदाय के कार्यक्रमों में काफी बदलाव हुआ है। मातृशक्ति ने अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज करवाई है। करीब पांच साल पहले सिंधी लेडीज क्लब की महिलाओं ने इसकी शुरुआत की जो अब रिवाज बन गया। सिंधी समुदाय की महिलाएं शहर से जुड़े प्रत्येक कार्यक्रम में सक्रिय योगदान दे रही हैं। क्लब संस्थापक दिशा प्रकाश किशनानी ने पत्रिका से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए।

गुरु ने पसंद कराया वर

दिशा (मीना) ने बताया कि परिवार की शुरू से ही स्वामी हिरदाराम में गहरी आस्था रही। शादी के पहले भोपाल में स्वामीजी के आश्रम में वोकेशनल ट्रेनिंग सेन्टर संभालती थी। स्वामीजी हरदाराम ने ही अजमेर के ही मनीष प्रकाश किशनानी को वर के रूप में अच्छा बताया। 1996 में दोनों की शादी हो गई।

पहली बार जुलूस शामिल हुई महिलाएं

दिशा ने बताया कि महिलाएं समाज का अभिन्न अंग हैं। वे घर संभालने के साथ व्यापार, नौकरी, समाजसेवा सभी क्षेत्रों में एक्टिव हैं। बरसों तक चेटीचण्ड में महिलाओं की सक्रिय भूमिका नहीं थी। सिन्धी महिलाओं के लिए उन्होंने सिन्धी लेडीज क्लब की स्थापना की। पांच-छह वर्ष से चेटीचण्ड के जुलूस में महिलाओं ने शामिल होना प्रारंभ किया। क्लब में हर महीने कार्यक्रम होते हैं।

करती हैं एक-दूसरे का सहयोग

महिलाएं एक-दूसरे का व्यापार में सहयोग करती हैं। प्रमोट करती हैं। कोरोना काल में क्लब की दो महिलाओं के परिवार का व्यापार खत्म हो गया। क्लब ने उन्हें नए व्यापार के सुझाव दिए। क्लब की सभी महिलाओं ने प्रमोट भी किया।

जुबान-स्वाद-संस्कृति का प्रमोशनदिशा ने बताया कि क्लब की महिलाएं सिंधी समाज के घरों में सिंधी संस्कृति को प्रमोट करती हैं। इसमें भाषा, खान-पान, तीज-त्योहार, रहन-सहन सहित कई घटक शामिल हैं। महिलाएं घर में किसी चीज को फॉलो करती हैं तो यह परिवार में आसानी से फैल जाता है।

फिर सेवा की शुरुआत

दिशा ने बताया कि 2007 में अजमेर लेडीज सोशल सोसायटी बनाई। इसमें कई समाजों की महिलाएं सदस्य हैं। महिलाएं गर्मी में स्टेशन पर पानी पिलाने, प्लास्टिक की थैलियों के प्रति जागरूक करने सहित अन्य सामाजिक कार्य करती हैं। कोरोना और लम्पी बीमारी में भी कार्य किया। इसके लिए किसी से चंदा नहीं लिया जाता है। महिलाएं खुद ही व्यय की व्यवस्था करती हैं।