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video : अनाथ बच्ची का पत्रिका ने थामा हाथ, सडक़ से उठाकर बच्ची को दिया नया संसार
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video : अनाथ बच्ची का पत्रिका ने थामा हाथ, सडक़ से उठाकर बच्ची को दिया नया संसार

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अजमेर. रक्षाबंधन पर्व पर अपनों की याद में आंखें छलक जाती हैं। उसकी आंखों में दस साल पूर्व का मंजर सामने आ जाता है। जब पिता की टीबी से मौत के बाद बजरंगगढ़ चौराहे पर अनाथ/ निराश्रित जीवन जीने पर मजबूर हो गई। सगे-रिश्तेदारों ने भी मासूम से मुंह फेर लिया। ऐसे वक्त में राजस्थान पत्रिका ने साथ दिया। बीते पलों को भूलकर ‘सीता’ के निशाने पर अब सिर्फ लक्ष्य है।

 

केसरगंज स्थित दयानन्द बाल सदन में निराश्रित बालिकाओं में वह ‘सीता’ भी हैं। रक्षाबंधन पर्व पर किसी बहन का भाई राखी बंधवाने पहुंचा तो किसी का धर्म भाई। सीता के परिवार में अब कोई नहीं है। मगर वह बाल सदन की साथी बालिकाओं को ही अपना भाई मानते हए राखी बांधती हैं। रविवार को भी थाल सजाया, रोली-मोली, रक्षासूत्र, मिठाई रखकर साथी छात्राओं की कलाई पर राखी बांधीं। मगर मन में जो भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा था उसे वह खुद ही महसूस कर पा रही थीं।



बदल गई जिंदगी

11 सितम्बर 2008 को बजरंगगढ़ चौराहे अनाथ सा जीवन जीने वाली अरांई की रहने वाली ‘सीता’ उस समय अनपढ़ थीं, उसके मुंह से लफ्ज भी नहीं फूट पाते थे। मगर जब राजस्थान पत्रिका की पहल पर जब दयानन्द बाल सदन में उसे आश्रय मिला तो उसकी जिंदगी बदल गई। कभी अनपढ़ रहीं सीता आज दसवीं की पढ़ाई कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा था- सरकार है साथ राजस्थान पत्रिका ने 11 सितम्बर से लगातार सिलसिलेवार अनाथ सीता को आश्रय व पालनहार संबंधी समाचारों की शृंखला शुरू की तो तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने तत्कालीन जिला कलक्टर नवीन महाजन को निर्देश दिए कि सीता को कहें कि वह अकेली नहीं है, सरकार उसके साथ है।

 

उसके बाद जिला कलक्टर व अति. कलक्टर स्नेहलता पंवार व बाल कल्याण समिति अध्यक्ष विद्या कमलाकर जोशी के माध्यम से उसे दयानन्द बाल सदन/निराश्रित बालिका गृह में पहुंचाया गया। गौरतलब है कि अरांई निवासी सीता के पिता रामदेव की टीबी अस्पताल जिन्दगी व मौत से जूझते हुए मौत हो गई। परिजन नेे भी शव उठाने से इंकार कर दिया।

 

बनना चाहती है पीटीआई

राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में एथेलेटिक्स में सीता ने हिस्सा लिया। सौ मीटर दौड़ में पांच राज्यों के खिलाडिय़ों को तो पछाड़ दिया मगर फाइनल में उसका चयन नहीं हो पाया। सीता बताती है कि भविष्य में वह शारीरिक शिक्षिका (पीटीआई) बनना चाहती है। सदन के प्रबंधक राजेन्द्र कुमार आर्य के अनुसार सीता खेलों के साथ पढ़ाई में भी होशियार है।