
तीर्थराज पुष्कर में आध्यात्मिक माहौल उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब श्री अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन में नवनिर्मित 'कृष्ण भवन' के लोकार्पण के दौरान समाज के दो धड़े एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। मर्यादाओं को ताक पर रखकर समाज के प्रबुद्ध जनों के बीच जमकर लात-घूंसे चले और धक्का-मुक्की हुई। यह सारा हंगामा परम पूज्य गोविंद देव गिरी जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ, जिससे पूरे माहेश्वरी समाज में रोष व्याप्त है।
दरअसल, बुधवार को माहेश्वरी सेवा सदन में नवनिर्मित हाल और कृष्ण भवन के शुभारंभ का कार्यक्रम रखा गया था। एक पक्ष जहाँ इसे विकास का हिस्सा बताकर भव्य समारोह कर रहा था, वहीं दूसरे पक्ष ने इसे 'नीति विरुद्ध' और 'विधान प्रोटोकॉल' का उल्लंघन बताकर विरोध शुरू कर दिया। विरोध इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच गाली-गलौज शुरू हो गई और देखते ही देखते मौके पर हाथपाई शुरू हो गई।
हंगामे की मुख्य वजह वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा लंबे समय से चुनाव नहीं कराया जाना बताया जा रहा है। विरोध कर रहे गुट का आरोप है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने और चुनाव न होने के बावजूद वर्तमान कार्यकारिणी मनमाने तरीके से आधे-अधूरे भवन का लोकार्पण कर रही है। आरोप यह भी है कि हंगामे के दौरान 'असामाजिक तत्वों' को बुलाकर हमला करवाया गया, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब विवाद बढ़ रहा था तब पुलिस शुरू में मूक-दर्शक बनी रही, लेकिन जब खून-खराबे जैसी स्थिति बनी तो पुलिस ने हस्तक्षेप कर किसी तरह भीड़ को तितर-बितर किया। भारी तनाव और हंगामे के बीच ही गोविंद देव गिरी महाराज ने 'कृष्ण भवन' का विधिवत लोकार्पण किया। महाराज ने इस दौरान शांति की अपील की, लेकिन उनके जाते ही पुनः विरोध की स्वर मुखर हो गए।
देशभर से आए माहेश्वरी समाज के प्रतिनिधियों ने पुष्कर जैसे पवित्र स्थान पर हुई इस हिंसा की कड़ी निंदा की है। समाज के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि सेवा सदन जैसे स्थान पर इस तरह का विवाद समाज की छवि को धूमिल करता है। सूत्रों के अनुसार, विरोध पक्ष अब इस मामले को लेकर कोर्ट जाने और पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
एक बड़ा आरोप यह भी लगा कि जिस कृष्ण भवन का लोकार्पण किया गया है, वह अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। आधे-अधूरे निर्माण का श्रेय लेने की होड़ में कार्यकारिणी ने आनन-फानन में महाराज को बुलाकर यह कार्यक्रम करवाया, जो कि संवैधानिक तौर पर गलत है।
Published on:
15 Apr 2026 05:12 pm
