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राजस्थान में खरीफ सीजन 2026 के आगाज के साथ ही भजनलाल सरकार 'एक्शन मोड' में नजर आ रही है। किसानों को खाद की किल्लत न हो और बिचौलिए उनकी मेहनत पर डाका न डाल सकें, इसके लिए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अधिकारियों को खुली छूट दे दी है। प्रदेशभर में खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनुदानित यूरिया के औद्योगिक उपयोग को रोकने के लिए विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया है।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के नेतृत्व में 11 अप्रैल से प्रदेशभर में विशेष गुण नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक:
विभाग को सूचना मिली थी कि किसानों के लिए आने वाला अनुदानित यूरिया चोरी-छिपे प्लाईवुड, रेजिन और पशु आहार बनाने वाली फैक्ट्रियों में भेजा जा रहा है। इस पर आयुक्त ने खुद कालाडेरा औद्योगिक क्षेत्र की प्लाईवुड इकाइयों पर छापेमारी की। सरकार ने चेतावनी दी है कि यूरिया का गैर-कृषि कार्य में उपयोग करने वाली इकाइयों को सीज कर उनके मालिकों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज होंगे।
कृषि मंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया है कि खाद की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में प्रदेश के सहकारी और निजी क्षेत्र में भारी स्टॉक उपलब्ध है:
डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा, "किसानों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है, आपूर्ति निरंतर जारी है और पिछले वर्षों की तुलना में इस बार हमारे पास अधिक स्टॉक है।"
प्रमुख शासन सचिव कृषि मंजू राजपाल ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के आधार पर ही उर्वरक उपयोग करने के लिए जागरूक करें। सरकार का लक्ष्य है कि किसान रासायनिक खाद पर निर्भरता कम कर हरी खाद, जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाएं, ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहे।
Updated on:
15 Apr 2026, 10:47 AM IST
Published on:
15 Apr 2026, 10:47 AM IST
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