
सपना गुर्जर और मोनिका गुर्जर की फोटो: पत्रिका
Government Officer Success Story: जहां रूढ़ियों की बेड़ियां आज भी कई सपनों को परवान चढ़ने से रोक देती हैं, वहीं अजमेर जिले के छोटे से गांव हासियावास की बेटियों ने फुटबॉल के मैदान से लेकर सरकारी दफ्तरों तक कामयाबी का परचम लहराया है।
सपना गुर्जर और मोनिका गुर्जर ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई, बल्कि पटवारी और स्टेनोग्राफर बनकर यह साबित कर दिया कि यदि परिवार का साथ मिले, तो बेटियां हर मैदान फतह कर सकती हैं।
अजमेर से करीब 35KM दूर हासियावास गांव में कभी बाल-विवाह के बाद बेटियां पढ़ाई छोड़ देती थीं, उस गांव की बेटियों ने पढ़ाई के साथ फुटबॉल खेल में पहचान बनाई। स्कूली फुटबॉल प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर अव्वल रहने एवं कई राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिताओं में प्रतिभा दिखाने वाली सपना गुर्जर बताती हैं कि परिवार का सहयोग मिला।
फुटबॉल खेलने एवं कॉलेज शिक्षा के लिए आगे बढ़ाया। स्नातक के साथ जब प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लिया तो सफलता मिली। जिला फुटबॉल संघ के सचिव व कोच सुधीर जोसफ के अनुसार हासियावास गांव में 100 से अधिक बेटियां जिला स्तर पर खेल चुकी हैं। करीब 30 से अधिक राज्य स्तर और 10 से अधिक राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं। एक-दो तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी भाग ले चुकी हैं।
हासियावास की सपना गुर्जर के अनुसार उसका पटवारी भर्ती परीक्षा में चयन हो गया है। ब्यावर जिले में नियुक्ति मिली है। मोनिका गुर्जर का स्टेनोग्राफर के पद पर चयन हुआ वर्तमान में मसूदा (ब्यावर) में कार्यरत हैं।
सपना की मां किसनी देवी ने बताया कि बेटियों को पढ़ाना चाहिए। तभी बेटियां आगे बढ़ सकती हैं। बेटियों को पढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया जाए। पहले पढ़ाई फिर विवाह के बारे में सोचें।
Updated on:
22 Feb 2026 08:24 am
Published on:
22 Feb 2026 08:23 am
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