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Ajmer: देश का पहला और दुनिया का छठा ‘गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन’ केस, 2 हिस्सों में बंटा पेट जोड़कर बचाई युवक की जान

Doctors Achievement: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अजमेर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से जुड़े चिकित्सकों ने अत्यंत जटिल और दुर्लभ ऑपरेशन कर गंभीर रूप से घायल युवक की जान बचाई है।

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दुर्लभ सर्जरी कर बचाई मरीज की जान, पत्रिका फोटो

दुर्लभ सर्जरी कर बचाई मरीज की जान, पत्रिका फोटो

Doctors Achievement: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अजमेर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से जुड़े चिकित्सकों ने अत्यंत जटिल और दुर्लभ ऑपरेशन कर गंभीर रूप से घायल युवक की जान बचाई है। चिकित्सकों ने इसे देश का पहला और दुनिया का छठा सफल ‘गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन’ ऑपरेशन होने का दावा किया है। चिकित्सकों ने भारी मार्बल ट्रॉली से कुचले मरीज के पेट के दो टुकड़े हो गए जिसका ऑपरेशन कर मरीज की जान बचाई गई है।

कॉलेज से संबद्ध जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में शल्य चिकित्सक डॉ. अनिल शर्मा और उनकी टीम ने यह सर्जरी की। 6 जून को किशनगढ़ की एक मार्बल फैक्टरी में भारी ट्रॉली से कुचलने पर युवक नुरसेद (29) का पेट (आमाशय) दो हिस्सों में बंट गया था। साथ ही तिल्ली और किडनी में गंभीर चोट, 8 पसलियां चकनाचूर और कूल्हे की हड्डी में दो फ्रैक्चर जैसी कई जानलेवा चोटें आई थीं। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने इमरजेंसी एक्सप्लोरेटरी पेट की जटिल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई। अधीक्षक डॉ. अरविन्द खरे के अनुसार, यह ऑपरेशन देश का पहला व दुनिया का छठा केस है।

देश का पहला और दुनिया का छठा मामला होने का दावा

चिकित्सकों ने इसे देश का पहला और दुनिया का छठा सफल ‘गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन’ ऑपरेशन होने का दावा किया है। चिकित्सकों के अनुसार मरीज के पेट के दो टुकड़ों का ऑपरेशन कर मरीज की जान बचाई गई है।

विशेषज्ञ टीम ने निभाई अहम भूमिका

ऑपरेशन में डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. पूर्णिमा सागर, डॉ. मेहुल, डॉ. नमन सोमानी और डॉ. विपिन दीप सिंह की सर्जिकल टीम के साथ डॉ. कुलदीप, डॉ. ज्योति और डॉ. एकता की एनेस्थीसिया टीम तथा नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रधानाचार्य जेएलएन मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अनिल सामरिया ने कहा कि यह केस भविष्य के मेडिकल छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक केस स्टडी बनेगा।