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Success Story: न पढ़ाई में टॉपर, न अंग्रेजी में तेज… मेवाड़ की बेटी हर्षिता ने सोशल मीडिया से बनाई पहचान

Success Story: मेवाड़ी बोली में शुरू हुआ हर्षिता का यह सफर अब रफ्तार पकड़ चुका है। मेहनत और पहचान ने उसके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया है। हर्षिता पुष्करणा की कहानी उन बेटियों के लिए प्रेरणा है जो अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं।
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उदयपुर

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Kamal Mishra

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Updated: 21 Feb 2026, 6:00 AM IST

Harshita Pushkarna

हर्षिता पुष्करणा (फोटो-पत्रिका)

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के निकट बसे मदार गांव की हर्षिता पुष्करणा की कहानी उन बेटियों के लिए प्रेरणा है जो अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं। न पढ़ाई में अव्वल, न खेलकूद में रुचि, न हिंदी-अंग्रेजी पर पकड़। हर्षिता को बस अपनी मेवाड़ी बोली से मोह था। यही मोह आगे चलकर उसकी ताकत बना और उसने साबित कर दिया कि जुनून और मेहनत हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं।

ताने, डांट और चिंता, फिर भी नहीं छोड़ा सपना

हर्षिता के शिक्षक और माता-पिता उसके करियर को लेकर चिंतित रहने लगे थे। रिश्तेदार और पड़ोसी उलाहना देते कि मोबाइल में क्या रखा है। वीडियो बनाकर क्या मिलेगा? 11वीं कक्षा में ही उसने वीडियो बनाना सीख लिया। माता-पिता की डांट भी पड़ी, लेकिन वीडियो बनाने का मोह नहीं छूटा। हर्षिता ने घरवालों को भरोसा दिलाया कि आपकी बेटी ऐसा करेगी कि आपको गर्व होगा।

पैशन बना कंटेंट क्रिएशन

धीरे-धीरे हर्षिता ने कंटेंट क्रिएशन को अपना पैशन बना लिया। उसने कॉमेडी और ट्रैवल वीडियो बनाने शुरू किए। उसकी खासियत बनी मेवाड़ी बोली में सहज, जमीन से जुड़ा कंटेंट। लोगों को उसकी भाषा, अंदाज़ और सादगी पसंद आने लगी। देखते-देखते सोशल मीडिया पर उसकी फॉलोअरशिप बढ़ती गई और पहचान बनने लगी।

साधारण परिवार, असाधारण हौसला

हर्षिता का परिवार बेहद साधारण है। पिता लक्ष्मीलाल मेडिकल शॉप पर काम करते हैं, जबकि मां खाने का लॉज चलाती हैं। हर्षिता ने कंटेंट क्रिएशन में अपनी बहन को भी साथ जोड़ा। जब आमदनी शुरू हुई तो दोनों बहनें घूमने निकल पड़तीं और हर यात्रा के साथ नया कंटेंट बनता। हर्षिता अब तक प्रदेश भर के पर्यटन और धार्मिक स्थलों के साथ-साथ प्रदेश के बाहर भी कई जगह घूम चुकी हैं।

पढ़ाई के साथ कर रहीं जॉब

हर्षिता ने बीएसटीसी किया है। वर्तमान में वह एक प्राइवेट कोचिंग संस्थान में नौकरी कर रही हैं और साथ ही पढ़ाई भी जारी है। हर्षिता का कहना है कि वह सरकारी नौकरी के लिए भी प्रयास करेंगी। हर्षिता मानती हैं कि मेहनत और लगन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है, लेकिन खुद पर भरोसा जरूरी है।

आत्मनिर्भरता की मिसाल

कंटेंट क्रिएशन से मिली आय से हर्षिता ने खुद की स्कूटी खरीदी, मोबाइल भी बदला। आज वह माता-पिता की आर्थिक मदद कर रही हैं। वह कहती हैं, एक समय था जब लोग मेरे माता-पिता को उलाहना देने आते थे, आज वही तारीफ करते हैं। हर्षिता का का कहना है कि पैसों में पावर होती है। इसलिए लड़कियों को खुद के दम पर आगे बढ़ना चाहिए।

मेहनत और पहचान से बढ़ा आत्मविश्वास

मेवाड़ी बोली में शुरू हुआ हर्षिता का यह सफर अब रफ्तार पकड़ चुका है। मेहनत और पहचान ने उसके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया। वह सरकारी नौकरी की ख्वाहिश जरूर रखती हैं, लेकिन उसने अपने सपनों से न सिर्फ अपना, बल्कि अपने परिवार का भी नाम रोशन किया है।