
poor condition of biggest wool market of Rajasthan
ब्यावर/ अजमेर। प्रदेश की मंडियों में अपनी धाक रखने वाली कृषि उपज मंडी का अब वो रुतबा नहीं रहा है। प्रदेश की सबसे बड़ी ऊन मंडी के रुप में इसकी पहचान रही। समय के साथ मंडी में जिंसों की आवक प्रभावित हुई तो कुछ वायदा कारोबार ने मंडी के कारोबार पर विपरीत असर डाला। हालांकि मंडी की राजस्व आय सालाना करीब डेढ़ करोड़ के करीब है। प्रदेश के दूर दराज क्षेत्रों से जिंसे लेकर काश्तकार ब्यावर पहुंचते थे। अब आस-पास के क्षेत्रों की आवक ही रह गई है। कृषि उपज मंडी यार्ड में काश्तकारों व व्यापारियों के लिए आंतरिक सड़कें, काश्तकार विश्राम गृह, रोशनी, प्लेटफार्म सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। मंडी में आने वाले काश्तकारों की जिंसों का तौल भाव करने के लिए तुला यंत्र भी लगा है। मंडी में आवक पर असर हुआ है। मंडी में ऊन की आवक अच्छी खासी थी। इससे मंडी की प्रदेश में अलग पहचान रही। ऊन की आवक पर असर होने के अलावा इसके मंडी टैक्स को भी कम कर दिया गया। इस कारण से भी मंडी के राजस्व आय का ग्राफ नीचे आ गया। यही कारण रहा का मंडी अ श्रेणी से सी श्रेणी में पहुंच गई।
इनसे हो रही आय
कृषि उपज मंडी में 325 दुकान व गोदाम बने हुए हैं। इनसे आने वाले किराए व कृषि मंडी टैक्स से आय हो रही। मंंडी टैक्स घटाने से मंडी की आय भी प्रभावित हुई। मंडी में पहले 1.6 0 प्रतिशत ऊन पर मंडी शुल्क था। जिसे घटाकर 0.01 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा अन्य पर भी टैक्स कम कर दिया गया। इस कारण से भी राजस्व आय कम हुई है।
70 गोदाम का नहीं हो सका आवंटन
कृषि उपज मंडी यार्ड में 70 गोदाम का निर्माण करीब बीस साल पहले कराया गया। इनके आवंटन की प्रक्रिया को लेकर व्यापारियों व मंडी प्रशासन के बीच तालमेल नहीं बैठ सका। इसके चलते इन गोदामों का आवंटन नहीं हो सका। अब तो यह हालात है कि यह पड़े-पड़े जर्जर होने लगे हैं। इनमें बड़े-बड़े पेड़ उग चुके हैं। अब तक भी इन्हें लेकर आपसी सामंजस्य नहीं है।
कृषक विश्राम गृह पर ताले
मंडी यार्ड में कृषक विश्राम गृह बना हुआ है। यहां पर काश्तकारों के आवास की सुविधा है। प्रतिदिन दस रुपए प्रतिदिन पर रहने के लिए कमरा मिल रहा है। इसके बावजूद सालों से कृषक विश्राम गृह में रहने के लिए कोई काश्तकार नहीं आया है। सालों से यह विश्राम गृह खाली ही पड़ा है।
सुविधा कचरे मेें गिरी
मंडी यार्ड में स्थित सुलभ शौचालय जर्जर हो रखा है। इसकी सालों से सुध नहीं ली गई। इसके चारों ओर कंटीली झांडिया व घास का डेरा है। जबकि सालों पहले इसको सुंदर व सुविधाजनक बनाया गया था। इसकी देखरेख के अभाव में यह जर्जर होता जा रहा है।
खाली पड़े हैं प्लेट फार्म
मंडी यार्ड में बने प्लेटफार्म आधे खाली पड़े हैं तो आधे में जिंसे रखी हुई हैं। मंडी यार्ड में तुला यंत्र के सामने स्थित प्लेटफार्म को गतदिनों कृषि उपज मंडी प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए खाली करवा दिए। सालों से पड़े कचरे को मंडी यार्ड से बाहर भिकवा दिया गया। अनाज मंडी की गोदाम की ओर स्थित प्लेटफार्म पर जिंसे रखी हुई है।
50 मजदूर करते हैं काम
कृषि उपज मंडी यार्ड में करीब 50 श्रमिक काम करते हैं। यहां पर काम करने वाले श्रमिक अधिकांश आस-पास के गांवों के हैं। जो प्रतिदिन आते हैं। काम कर शाम को वापस लौट जाते हैं। मंडी में आने वाली जिंसों की सफाई करने, बोरियां खाली करने एवं वापस भरने का श्रमिक काम करते हैं।
इनका कहना है
मंडी में सालाना करीब डेढ़ करोड़ की राजस्व आय है। यहां पर अलग-अलग प्रकार की जिंसों की आवक होती है। मंडी सी श्रेणी की है। अगर यही आय नियमित रहती है तो मंडी का श्रेणी सुधार भी होगा। -महेश शर्मा, सचिव, कृषि उपज मंडी
मंडी की आवक पर्याप्त है। काश्तकारों का भी मंडी की ओर रुझान है। वायदा कारोबार शुरु होने के बाद मंडी के कारोबार पर असर हुआ है। वायदा कारोबार को लेकर सरकार को विशेष व व्यापार की दृष्टि से सकारात्मक कदम उठाने चाहिए। -राजेश तातेड, अध्यक्ष, दी ग्रेट मर्चेन्ट एसोशिएसन
Published on:
30 Sept 2018 01:23 pm
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
