5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आना सागर झील में डबल डेकर क्रूज चलाने की तैयारी क्रूज पर रेस्टोरेंट भी होगा संचालित

नगर निगम ने जारी की निविदा 7 साल के लिए 50 लाख रूपए की होगी कमाई नगर निगम के लिए कमाऊ पूत बना आनासागर

3 min read
Google source verification
ajmer

ajmer

भूपेन्द्र सिंह

अजमेर. एतिहासिक आना सागर की झील की दुर्दशा सुधारने पर भले ही नगर निगम का ध्यान नहीं हो लेकिन इसके जरिए कमाई करने का जुगाड़ लगातार किया जा रहा है। भले ही इससे झील का पारिस्थितिकीय तंत्र ही क्यों न प्रभावित हो रहा हो। झील में लाखों रूपए का नौकायन का ठेका देने, टापू के नाम पर झील के बीच में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने, झील के किनारे लवकुश उद्यान में लाखों रूपए में रेस्टोरेंट संचालन का ठेके देने, लाखों रूपए का मछली पालना का ठेका देने के बाद अब झील में दो मंजिला क्रूज का संचालन का ठेका देकर 7 साल में 50 लाख रूपए कमाने की भी योजना बना ली गई है। निगम ने इसके लिए ऑन लाइन टेंडर भी जारी कर दिए है।

दो मंजिली क्रूज पर लंच, डिनर तथा ब्रेकफास्ट की सुविधा भी मिलेगी। निगम की योजना झील में वाटर स्कूटर के संचालन की भी है। प्रवासी पक्षियों पर पड़ेगा विपरीत असर आना सागर झील सर्दियों के दौरान प्रवासी परिंदों को ठौर उपलब्ध करवाती है। झील से इन्हें पर्याप्त भोजन तथा रहवास उपलब्ध होता है। ये दिनभर पानी में अठखेलियां करते है। क्रूज के संचालन तथा वाटर स्कूटर से इन पर विपरीत असर पड़ेगा। झील में नौकायन के नाम पर दो अलग-अलग ठिकाने बना दिए गए है। इसके लिए झील में जमकर पक्का निर्माण व कब्जा भी कर लिया गया है। इससे भी पक्षियों के प्रवास पर असर पड़ रहा है।

झील में बढ़ेगा प्रदूषण

आना सागर झील मे शहर के 10 नालों का गंदा पानी बिना साफ किए ही गिरता है। इनके जरिए कूड़ा कचरा भी झील में पहुंचता है। झील लगातार प्रदूषित हो रही है। झील में क्रूज के संचालने से झील में ध्वनी तथा वायू प्रदूषण बढ़ेगा। क्रूज पर ही रेस्टोरेंट का भी संचालन होगा इससे भी प्रदूषण बढ़ेगा। झील की शांति बाधित होगी। झील में इन दिनों म्यूजिकल फाउंटेन के नाम पर चौपाटी किनारे कानफोड़ू फिल्मी गाने बजाए जा रहे हैं इससे झील की शांति भंग हो रही है। इससे के आलावा झील के किनारों तथा टापू पर जगमग लाइटिंग भी झील के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए उचित नहीं है।

कहीं उदयपुर जैसा हाल न हो जाए हाल

ही उदयपुर की पिछौला झील में भी दो मंजिला क्रूज का संचालन शुरु किया गया था लेकिन उदयपुर की जिला अदालत ने सख्ती दिखाते हुए इसे झील से बाहर निकालने के लिए आदेश दे दिए है। इसके लिए उदयपुर झील के आम लोगों तथा पर्यावरण प्रेमियों ने आवाज उठाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

आनासागर को लेकर हो रहा पहले ही विरोध

आना सागर झील में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत पाथ वे तथा किनारे पर सेवन वंडर का निर्माण हो रहा है। इसका लगातार विरोध भी हो रहा है। केन्द्र सरकार ने इसके जांच के आदेश दे रखें है वहीं एनजीटी ने भी नियमों की पालना के निर्देश जारी कर दिए है। ऐसे में अजमेर भी झील में क्रूज संचालन का विरोध हो सकता है।

इनका कहना है

मत्स्य विभाग से टाइअप कर इसका रूट तय करेंगे। क्रूज स्पीड बोट से भी धीमी रफ्तार पर चलता है। इसका झील पर साइंटिफिकली झील पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्रूज शहर के लिए नई एक्टीविटी है लोगों के नया टूरिस्ट स्पॉट मिलेगा। क्रूज से भी पक्षियों को देखा जा सकेगा। झील की सफाई के लिए डीवीडिंग मशीन संचालित की जा रही है। उदयपुर के कारण अलग हो सकते है।

डॉ.खुशाल यादव,उपायुक्त ,नगर निगम अजमेर

झील में वेटलैंड पहल ही छोटा कर दिया गया है। अब व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं। इससे प्रवासी पक्षियों का आना प्रभावित होगा। पक्षियों को चकाचौंध और शोर पसंद नहीं है। क्रूज से भले ही आय हो लेकर इससे झील को नुकसान होगा। झील के पानी में ऑर्गेनिक लोड अधिक है ऑक्सीजन का लेवल कम है। ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए फाउंटेन चलाएं लेकिन तेज आवाज में म्यूजिक ठीक नहीं। झील का अध्ययन जरूरी है।

प्रो. प्रवीण माथुर, विभागध्यक्ष, पर्यावरण विभाग, एमडीएस यूनिवर्सिटी

read more:स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: चौपाटी पर अब होगा एक घंटे का म्यूजिकल फाउंटेन-शो