
president kovind visit ajmer and pushkar
राष्ट्रपति की पुष्कर यात्रा को लेकर पूरे पुष्कर कस्बे खासकर पुष्कर सरोवर के किनारे बने सभी 52 घाटों, ब्रह्मचौक से ब्रह्मा मंदिर तक चप्पे चप्पे पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पूजन व मंदिर दर्शन के दौरान पुष्कर सरोवर के 52 घाटों पर सुबह 8 बजे से ही आम श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया गया है। वहीं ब्रह्म चौक से लेकर ब्रह्मा मंदिर तक के बाजार की दुकानें बंद करा दी गई हैं। ब्रह्मा मंदिर में पूजा करने के बाद ही आम श्रद्धालु प्रवेश कर सकेंगे। यात्रा को लेकर पूरा जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है।
तो चारधाम की यात्रा अधूरी
पुष्कर का पौराणिक काल से महत्व है। ऐसी मान्यता है कि पुष्कर की यात्रा किए बगैर आपकी चारधाम की यात्रा भी अधूरी रहती है। पुष्कर को देश का तीर्थगुरू कहा जाता है। यहीं पर प्रजापिता ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। समुद्र मंथन में निकले कलश से तीन पुष्प इसी क्षेत्र में गिरे थे। इसीलिए यहां बूढ़ा पुष्कर, मध्य पुष्कर और नया पुष्कर नाम से सरोवर बने हुए हैं।
सुरक्षा इंतजाम परखे
संभागीय आयुक्त हनुमानसहाय मीणा, पुलिस महानिरीक्षक मालती अग्रवाल, जिला कलक्टर आरती डोगरा, गुप्तचर विभाग के एस. पी. सहित सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने रविवार दोनों स्थानों की बारीकी से व्यवस्थाएं जांची तथा कारकेड की रिहर्सल करवाई गई।
मंदिर की पहली सीढ़ी के पास ही पूजन
उपखंड अधिकारी विष्णु कुमार गोयल ने बताया कि राष्ट्रपति कोविंद ब्रह्मा मंदिर की पहली सीढ़ी के पास ही पूजन करेगे। इसी प्रकार से ब्रह्म घाट के मुख्य द्वार पर शंकराचार्य के मंदिर के पास ही पुष्कर सरोवर की पूजा अर्चना करने का कार्यक्रम है। दोनों स्थानो पर सीढिय़ां अधिक होने के कारण व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है।
कार्यक्रम पर एक नजर
राष्ट्रपति कोविंद सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर अजमेर से सड़क मार्ग होते हुए पुष्कर के ब्रह्म घाट पहुंचेंगे। यहां पर घाट के मुख्य द्वार पर उनका मात्र 10 मिनट पूजा करने का कार्यक्रम तय है। दोपहर 11 बजकर 30 मिनट पर वे ब्रह्मा मंदिर पहुंचेंगे। वे दोपहर 12 बजे तक पूजा अर्चना करेंगे।
संसदीय सचिव ने जांची व्यवस्थाएं राष्ट्रपति की यात्रा से पूर्व रविवार की शाम संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत ने पालिकाध्यक्ष कमलपाठक के साथ ब्रह्म घाट पहुंचकर पूजन की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
32 साल बाद राष्ट्रपति का पुष्कर दौरा
देश के प्रथम नागरिक की 32 साल के अन्तराल में पुष्कर यात्रा होगी। इससे पूर्व वर्ष 86 में तात्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह पुष्कर आए थे। हालांकि शंकरदयाल शर्मा एवं वेंकटरमण भी पुष्कर आए थे लेकिन उस समय वे दोनों ही उपरराष्ट्रपति पद पर थे। इस दौरान प्रधानमंत्री के रूप में अटलबिहारी वाजपेयी, चन्द्रशेखर, वी. पी. सिंह ने पुष्कर यात्रा की थी।
Published on:
14 May 2018 10:11 am

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