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Maha sivratri: खास है अजमेर का यह शिव मंदिर, सम्राट पृथ्वीराज और संयोगिता मनाते थे यहां शिवरात्रि

शिवरात्रि के दिन दूर दूर से अनेक श्रद्धालु यहां जल चढ़ाने आते है व पिकनिक,गोठ एवं प्रसादी का भी आयोजन करते हैं।

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koteshwar mahadev temple

koteshwar mahadev temple

स्थित हाथीखेड़ा ग्राम में स्थित कोटेश्वर महादेव का मंदिर लगभग 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है। इस मंदिर की लोकप्रियता व चमत्कार के चलते मंदिर अजमेर सहित आस पास के ग्राम व शहरों में भी काफ ी प्रसिद्ध है। शुरुआत में यह मंदिर पहाड़ के नीचे एक छोटी सी गुफ ा में स्थित था। गुजऱते समय के साथ यहां भक्तों के सहयोग से निर्माण कार्य प्रारम्भ होने लगे।

यहां हर वर्ष शिवरात्रिसावन मास में सहस्त्रधारा व अभिषेक होते हैं। शिवरात्रि के दिन दूर दूर से अनेक श्रद्धालु यहां जल चढ़ाने आते है व पिकनिक,गोठ एवं प्रसादी का भी आयोजन करते हैं।

टीवी धारावाहिक में दिख चुका है यह मंदिर

इस मंदिर का इतिहास काफ ी प्राचीन हैं कुछ लोग इसे मराठाकालीन बताते हैं तो कुछ इसे पृथ्वीराज चौहान के समय का मंदिर बताते हैं। क्षेत्रवासी व मन्दिर की देख रेख करने वाले विनोद शर्मा ने बताया कि संयोगिता और पृथ्वीराज दोनों इसी मंदिर में पूजा के लिए जाते थे। वर्ष 2006 से 2009 तक स्टार प्लस के धारावाहिक पृथ्वीराज चौहान में भी इस मंदिर को दर्शाया गया था।

शिवलिंग का जल होता है रीसायकिल

मंदिर की एक विशेषता यह भी है की शिवलिंग पर चढऩे वाला जल पहाड़ों से गुजरता हुआ कुएं में जाता है। इससे पानी को व्यर्थ होने से बचाया जाता है जो रिसाइकिल होकर पुन: काम में आता है ।

इस मंदिर की देखबाल अपने घर की तरह ही की जाती है। भगवान की आरती व श्रृंगार सुबह शाम किया जाता है। भाद्रपद में यहांएक बड़ा कार्यक्रम किया जाता है। इसशिवरात्रि भी यहां सुबह से जलाभिषेक व पूरे दिन प्रसाद वितरण किया जाएगा।

विनोद शर्मा, देखबाल कर्ता

परिवार के साथ हम प्रतिदिन इस मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं। दर्शन के बाद ही हमारे घर में कामकाज की तरफ ध्यान दिया जाता है। मन्दिर की वजह से इस सुनसान इलाके में भी हर पल मेले एवं मौज मस्ती का माहौल बना रहता है।

रेणु श्रीमाली, श्रध्दालु
मन्दिर में सभी उत्सव धूम धाम से मनाए जाते है। चाहे सावन का मेला हो या शिवरात्रि एवं राखी क्या त्योहार सभी दिन 500 से भी अधिक श्रद्धालु यहां पूजा पाठ करने आते हैं।

एकता

मंदिर में दर्शन करते हुए काफि समय बीत गया। 40 से अधिक वर्षों से यहां जाते आए हैं। दिनो दिन यह मंदिर प्रसिध्दि की ऊंचाईयों को छु रहा है।
लीला देवी, श्रध्दालु