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खरीदना पड़े इसको तो होगा करेंसी का संकट, बैंक में भी नहीं रख सकते जमा

अफसर छतों के पानी को भूमिगत टैंक में संरक्षित करने की योजना को भुलाए बैठे हैं। ऐसा तब है जबकि पूरे अजमेर जिले में साल दर साल बरसात घट रही है।

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rain water not save in ajmer

rain water not save in ajmer

रक्तिम तिवारी/अजमेर।

हर साल बरसात में हजारों लीटर पानी सड़कों-नालियों में व्यर्थ बह जाता है। अगर इसे खरीदना पड़ जाए तो जेब से हजारों रुपए ढीले करने पड़ेंगे। लेकिन कई सरकारी महकमे और संस्थाएं इस 'अमृत की महत्ता से इत्तेफाक नहीं रखते। अफसर छतों के पानी को भूमिगत टैंक में संरक्षित करने की योजना को भुलाए बैठे हैं। ऐसा तब है जबकि पूरे अजमेर जिले में साल दर साल बरसात घट रही है। फिर भी भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत यानी पानी की बचत नहीं हो रही है।

केंद्र अैार राज्य सरकार ने सभी सरकारी अैार निजी विभागों, आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों को बरसात के पानी को संग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। कई सरकारी और निजी महकमों और घरों में इसकी शुरुआत हो भी गई है। फिर भी यह इनकी संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक ही हैं। तकरीबन सरकारी दफ्तरों में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी पानी की किल्लत से वाकिफ हैं, फिर भी छतों के पानी को पाइपों के सहारे भूमिगत टैंक में संरक्षित करने के प्रयास नहीं हो रहे।

कई महकमे अभी पीछे

केंद्र और राज्य सरकार, अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम के निर्देशों के बावजूद कई सरकारी विभागों में बरसात के पानी का संग्रहण नहीं हो रहा। इनमें महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, मेडिकल, दयानंद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, सीबीएसई और राज्य एवं केंद्र सरकार के विभिन्न महकमे, निजी स्कूल, अद्र्ध सरकारी विभाग शामिल हैं। जल संरक्षण की सीख देने वाले जलदाय और जल संसाधन विकास के दफ्तर, बिजली विभाग और अन्य कार्यालय भी पीछे हैं।

बह जाता है हजारों लीटर पानी
हर साल शहर में मानसून के दौरान जून से सितम्बर, जनवरी-फरवरी में मावठ के दौरान बरसात होती है। करीब 60 प्रतिशत सरकारी महकमों, निजी प्रतिष्ठानों, स्कूल-कॉलेज और अन्य संस्थाओं में रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं है। यही वजह है, कि बरसात के दौरान हजारों लीटर पानी बेकार ही बह जाता है। नला बाजार, कचहरी रोड, मदार गेट, महावीर सर्किल, वैशाली नगर, सावित्री स्कूल चौराहा, जयपुर रोड, मार्टिंडल ब्रिज, तोपदड़ा और आगरा गेट में पानी का भराव सर्वाधिक होता है। यह पानी आसपास की पहाडिय़ों, घरों, दुकानों, सरकारी-निजी विभागों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों से बहकर सड़कों पर पहुंचता है। इसके बाद यह नालियों-नालों से होकर आनसागर-फायसागर या खेतों-खाली प्लॉटों में भर जाता है। इस पानी का कोई इस्तेमाल नहीं होता है।

हो जाए जेब ढीली, नहीं बचाएंगे पानी

जलदाय विभाग प्रतिमाह पेयजल सप्लाई पर बिल भेजता है। घरों, सरकारी-निजी महकमों, स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य संस्थाओं में औसत बिल 150 से 300 रुपए तक आता है। गर्मियों में पानी की किल्लत होने पर लोगों को 500 से 700 रुपए देकर टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। बरसात के रूप में जिले में करीब 5,550 एमसीएफटी पानी गिरता है। इसमें से ढाई हजार एमसीएफटी पानी ही झीलों-तालाबों अथवा भूमिगत टैंक तक पहुंचता है। बाकी पानी व्यर्थ बह जाता है। पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण माथुर की मानें तो बरसात के पानी की बचत से हजारों रुपए का नुकसान बच सकता है।

इन महकमों ने समझी उपयोगिता

प्रादेशिक परिवहन विभाग के जयपुर रोड कार्यालय में पहले छत का पानी बहकर नालियों अथवा आसपास खेतों में बह जाता था। विभाग ने इस पानी को संग्रहित करने के लिए ' रेन वाटर हार्वेस्टिंगÓ प्रणाली विकसित की है। परिसर में एक बड़ा टैंक का निर्माण कराया गया है। छत से नीचे आने वाली पाइपों को आपस में जोड़कर टैंक तक लाया गया है। इसी तरह सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय में करीब छह वर्ष से बरसात के पानी का संग्रहण हो रहा है। कॉलेज विभिन्न प्रयोगशाला और छात्रावास सहित दैनिक इस्तेमाल में बरसात के दौरान संग्रहित पानी का इस्तेमाल कर रहा है।

इस साल जलाशयों में पानी की स्थिति (फीट में)
आनासागर 13.4, फॉयसागर 9.4, रामसर 2.1, शिवसागर न्यारा 9.8, पुष्कर 6.5, राजियावास 4.7, मकरेड़ा 12.1, अजगरा 2.4, ताज सरोवर अरनिया 5.10, मदन सरोवर धानवा 4.4, पारा में 7.1, नारायण सागर खारी 1.6, देह सागर बडली 8.5, न्यू बरोल 1.1 तथा मान सागर जोताया 3.8 भीम सागर तिहारी 4.3, खानपुरा तालाब 2ए चौरसियावास 1.5, खीरसमंद रामसर 2, लाकोलाव टैंक हनौतिया 3.5, पुराना तालाब बलाड़ 3.6, जवाजा तालाब 12.9, काली शंकर तालाब 3.9, देलवाड़ा तालाब 3.1, छोटा तालाब चाट 5.8, मदन सागर डींडवाडा 2.6, बूढ़ा पुष्कर 5.3, कोडिय़ा सागर अरांई 4, जवाहर सागर सिरोंज 3, सुरखेली सागर अरांई 2.9, बिजयसागर लाम्बा 3.6, विजयसागर फतेहगढ़ 3.4, बांके सागर सरवाड़ 7.8, सावर सागर दोथली में 0.90 तथा नया सागर मोठी 0.85 फीट।

छह साल में हुई कम बरसात

(1 जून से 30 सितम्बर)
2012-520.2

2013-540
2014-545.8

2015-381.44
2016-512.07

2017-450