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Human Story: हादसे में जान बची तो तीन माह के मासूम को गोद से लिए घूमते रहे परिजन

आंखों देखी : असंतुलित बस को आता देख रामावतार की आवाज से पत्नी निशा भी सम्भली तो बच गई तीन जान

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अजमेर

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Manish Singh

Dec 26, 2023

Human Story: हादसे में जान बची तो तीन माह के मासूम को गोद से लिए घूमते रहे परिजन

जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में आपबीती सुनाती कालीदेवी मीणा।,जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में आपबीती सुनाती कालीदेवी मीणा।,जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में आपबीती सुनाती कालीदेवी मीणा।

अजमेर. समीवर्ती राजगढ़ गांव में सोमवार शाम को पेश आए हादसे में दो घंटे बाद भी प्रत्यक्षदर्शियों के हाथ पैर कांप रहे थे...मासूम को गोद मं थामे बुआ के मुंह के शब्द भी नहीं निकल पा रहे थे...। आंखों में आंसू और भाभी को बच्चे की झलक दिखाने के लिए वह अस्पताल में एक्स-रे कक्ष के बाहर इंतजार कर रही थी।
चश्मदीद-1 भाई ने शोर मचाया तो बच गई जान
अलवर रेनी से आई कालीबाई मीणा जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की आपातकालीन इकाई में हादसे को यादकर फफक कर रो पड़ी। उसने बताया कि मन्नत पूरी होने पर भाभी निशा अपने तीन माह के बेटे को लेकर राजगढ़ भैरवधाम पर आई थी। साथ में उसकी मां व निशा की सास कमलादेवी और उसका भाई रामअवतार समेत 12-13 लोग राजगढ़ धाम दर्शन करने आए थे। उनका परिवार राजगढ़ पुलिस चौकी के सामने बस का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान हादसा पेश आया। गनीमत रही कि बस को नजदीक आता देखकर भाई रामावतार ने शोर मचाया। जहा्ं बैठे लोग इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाई लेकिन बच्चे को दूध पिला रही निशा अचानक नहीं उठ सकी।
...खरोंच तक नहीं आई
काली देवी ने बताया कि हादसे में भाभी निशा के पैर में गम्भीर चोट आई लेकिन 3 माह के बालक के खरोंच तक नहीं आई। बेटे को अस्पताल में सकुशल देखकर निशा भी अपने पैर टूटने का दर्द कुछ पल के लिए भूल गई। मासूम बालक को परिजन अपने सीने से लगाए घूमते रहे।

चश्मदीद -2 साडू भर रहे थे पानी, मैं बच गया
पाली डिगाना से आए भीम सिंह ने बताया कि वह अपने साडू लालसिंह के साथ राजगढ़ धाम आया था। साडू लालसिंह चौकी के सामने स्थित वाटर कूलर से पानी भरने के लिए चला गया जबकि वह सड़क के एक तरफ किनारे पर खड़ा हो गया। तभी बेकाबू बस ढलान से लुढ़कती आई और लोगों को कुचलते हुए चौकी के सामने मौजूद टंकी से जाकर टकरा गई।

चश्मदीद-3 चिल्लाता नहीं तो चली जाती जान

अलवर रेनी निवासी रामावतार ने बताया कि बस को यात्री धक्का लगा रहे थे जबकि कुछ यात्री बस में बड़े हुए थे। बस ढलान पर तेजी से नीचे आई तो चालक नियंत्रित नहीं कर सका। बस को तेजी से अपनी ओर आता देखा तो शोर मचाते हुए दौड़ कर हट गया। उसके शोर मचाने से काफी लोग हट गए लेकिन बच्चे को दूध पिला रही निशा बेटे को लेकर खड़ी नहीं हो सकी। वह बस की चपेट में आ गई। उसके पैर में चोट आई जबकि वह बच्चे को सीने से चिपकाए रखी।

चश्मदीद-4 प्रशासन ने दिखाई लापरवाही
प्रत्यक्षदर्शी देवीलाल सोनी ने बताया कि वह अपने कुछ मित्रों के साथ राजगढ़ गया था। हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचा तो देखा अफरा-तफरी मची थी। घायलों को बस के नीचे से निकालकर एम्बुलेन्स में चढ़ाया। सोनी ने बताया कि राजगढ़ धाम के स्थापना दिवस के 25 साल पूरे होने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए थे ऐसे में पुलिस प्रशासन को भारी वाहन बाहर खड़े करवाने चाहिए।