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गांव की सेवा के साथ सरकारी स्कूल में दो घंटे पढ़ा रहीं सरपंच

महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी मीडियम स्कूल में बालिकाओं को पढ़ा रहीं, एक साल के मासूम बच्चे को मां के पास छोड़ कर रोजाना स्कूल में दे रहीं हैं समय, गांव की शिक्षित महिलाओं से भी मांगा समय का सहयोग

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गांव की सेवा के साथ सरकारी स्कूल में दो घंटे पढ़ा रहीं सरपंच

गांव की सेवा के साथ सरकारी स्कूल में दो घंटे पढ़ा रहीं सरपंच

अजमेर. गांव की बेटियों को अच्छी तालीम मिले, बारहवीं के बाद पढ़ाई नहीं छोड़ें और उच्च शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में भी गांव की बेटियां शामिल होकर नाम रोशन करें। इसी मकसद को लेकर सरपंच खुद रोजाना सरकारी स्कूल में दो घंटे अंग्रेजी एवं इतिहास पढ़ा रही हैं।

अजमेर जिले के गगवाना गांव की सरपंच गुलजान खानम गांव की समस्याओं के समाधान के साथ बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में जुटीं हैं। वे महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गगवाना में दसवीं एवं सातवीं कक्षा की बालिकाओं को अंग्रेजी और इतिहास विषय पढ़ा रही हैं। शिक्षिकाओं की कमी की पूर्ति करते हुए वे दो घंटे का समय दे रही हैं।

पढ़ाई के साथ कॅरियर काउंसलिंग

सरपंच खानम ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि बालिकाओं को अभी से ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी करा रही हूं। पढ़ाने के साथ उन्हें आरएएस, आईएएस व अन्य भर्ती परीक्षा की तैयारी के भी टिप्स दे रही हैं, ताकि बालिकाएं पढ़ाई बीच में नहीं छोड़ें।

कई परिवार बेटियों को पढ़ाने बाहर नहीं भेजते हैं

उन्होंने बताया कि अधिकांश मुस्लिम परिवारों में बालिकाओं को बाहर पढ़ने के लिए नहीं भेजते हैं। उम्र के साथ शादी कर देते हैं। ऐसे में कई बालिकाओं के सपने अधूरे रह जाते हैं। वह चाहती हैं कि गांव की शिक्षित महिलाएं आगे आएं और बेटियों को पढ़ाने व काउंसलिंग में सहयोग करें।

अंग्रेजी मीडियम से पढ़ीं और बीएड करने के बाद बनीं सरपंच

खानम ने बताया कि वह सोफिया कॉलेज से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर उत्तीर्ण हैं। बीएड करने के साथ रीट एवं सीटेट उत्तीर्ण हैं। शादी होने के बाद वर्ष 2020 में वह सरपंच बनीं। पति बिलाल खान भी उन्हें इस काम के लिए प्रेरित करते हैं। स्कूल में पढ़ाई कराने के दौरान एक वर्ष के बेटे को वह अपनी मां के पास छोड़कर आती हैं।