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जवान ही कर रहे साइबर जालसाजों से दो-दो हाथ

कारण : पुलिस बेड़े में साइबर एक्सपर्ट की कमी मजबूरी : प्रदेश में एकमात्र थाना वो भी जयपुर में

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Cyber Crime

Cyber Cell

तरूण कश्यप.

अजमेर. डिजीटल लेनदेन के चलन के साथ ही साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। यदि अजमेर की ही बात की जाए तो एक हफ्ते के भीतर शहर के विभिन्न् थानों में साइबर ठगों के खिलाफ सात मुकदमे दर्ज हुए हैं। साइबर अपराधों का तेजी से बढ़ता ग्राफ बताता है कि जालसाज किस कदर शातिर हैं और हम किसी कदर लापरवाही बरत रहे हैं। इन मामलों में कानूनी कार्रवाई का खौफ कम होना भी एक मुख्य कारण है क्योंकि साइबर ठग अच्छे से जानते हैं कि उनको ढूंढना पुलिस के लिए मुश्किल टास्क है। पुलिस के पास साइबर एक्सपर्ट की कमी है। साथ ही साइबर क्राइम को खोलने के लिए बाहर से साइबर एक्सपर्ट को बुलाने का प्रावधान भी पुलिस विभाग के पास नहीं है। ऐसे में कंप्यूटर के जानकार कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल स्तर के जवान ही साइबर अपराधों को खोलने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।

हर जिले में साइबर सेल

प्रदेश में साइबर क्राइम के मामलों के लिए एकमात्र थाना जयपुर में है हालांकि पुलिस ने हर जिले में साइबर सेल बना रखी है। किसी भी वारदात को खोलने के लिए मोबाइल कॉल डिटेल, टावर लोकेशन व आरोपियों को ट्रेस करने सहित इस तरह के अन्य काम साइबरसेल ही करती है। इस साइबर सेल में पुलिस के कर्मचारी ही कंप्यूटर की जानकारी लेकर अपने स्तर पर वारदातें खोलने का प्रयास करते हैं।

इनका कहना है

यह सही है कि पुलिस के पास साइबर एक्सपर्ट नहीं है। साइबर क्राइम खोलने के लिए जिला स्तर पर साइबरसेल बना रखी है। इसमें कंप्यूटर के जानकार पुलिसकर्मी होते हैं, जो इन अपराधों को खोलने के लिए प्रयासरत हैं।

विकास पुलिस अधीक्षक, अजमेर

ऐसे रहें सुरक्षित---

- मोबाइल में आने वाले अनजान एसएमएस के प्रति गंभीरता न दिखाएं। न ही उनमें आए अनजान लिंक पर कदापि क्लिक करें।

- किसी भी व्यक्ति को मोबाइल या एमएसएम के मार्फत अपने बैंक व अन्य पहचान पत्र संबंधी जानकारी शेयर नहीं करें।

- साइबर ठगों को एटीएम व क्रेडिट कार्ड के नम्बर और पासवर्ड कभी भी नहीं बताएं।

- मोबाइल में आने वाले ओटीपी नम्बर भी किसी से शेयर न करें।

1930 पर तुरंत शिकायत करें

राज्य में बढ़ते साइबर अपराध की रोकथाम व कार्रवाई के लिए पुलिस ने साइबर सेल स्थापित कर रखी है। यदि किसी के साथ साइबर ठगी या ऑनलाइन ठगी हो गई है तो तुरंत साइबर सेल के टोल फ्री नम्बर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

यह सावधानी बरतें---

- अनजान या बैंक के नाम से कोई एसएमएस या ई-मेल के लिंक (यूआरएल) पर क्लिक न करें। यूआरएल पर क्लिक (कई बार वैरिफिकेशन फॉर्म या सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए कहता है) करने से ना सिर्फ मोबाइल या कम्प्यूटर डाटा मेलवेयर या ऐप एक्सेस की वजह से ट्रांसफर होते हैं, बल्कि रेनसमवेयर भी इंस्टॉल हो सकता है। जिसकी वजह से डाटा एन्कि्रप्ट हो जाता है।

- अगर कोई अनजान व्यक्ति खाते में रुपए जमा कराता है तो इससे उसकी आइडी वैलिडेशन या वास्तविक व्यक्ति साबित नहीं होता है।

- कोई भी कम्पनी या बैंक बिना सिबिल स्कोर या सम्पूर्ण दस्तावेज के बगैर उचित ब्याज दर पर लोन नहीं देती है।

- किसी को भी ओटीपी शेयर न करें। यदि गलती हो जाती है तो तुरंत बैंक या साइबर क्राइम हेल्प लाइन नम्बर 1930 या आरबीआई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।