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Rajasthan Crime-धमकियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलर्ट का संकेत या बड़ा ‘खतरा’

बीते तीन माह में प्रदेश के कई शहरों में मिलीं 15 से ज्यादा धमकियां, दिल्ली में मिले संदिग्ध से पूछताछ लेकिन अजमेर में मिली धमकियों की आईडी से नहीं खा रहा मेल
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अजमेर

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Manish Singh

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मनीष कुमार सिंह

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Updated: 14 Apr 2026, 2:48 AM IST

धमकियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलर्ट का संकेत या बड़ा ‘खतरा’

मुख्य डाक घर में बम की धमकी के बाद जांच करती बम निरोधक टीम, ड़ॉग स्क्वायर्ड और कोतवाली थाना पुलिस। फाइल फोटो पत्रिका

अजमेर(Ajmer News). प्रदेश में बीते तीन माह में कई शहरों में बम धमकियों की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड में ला दिया है। भले ही अधिकांश धमकियां फर्जी साबित हुई लेकिन नागौर में विस्फोटक बरामदगी, हरियाणा के अंबाला में अजमेर कनेक्शन के साथ आरडीएक्स पकड़े जाने जैसे मामलों ने सम्भावित बड़े खतरे की ओर इशारा किया है। ऐसे में सवाल उठता है क्या राजस्थान बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा है? खास बात यह है कि तीन माह में इन धमकियों के आरोपी का पुलिस व साइबर एक्सपर्ट सुराग तक नहीं लगा सके हैं।

प्रदेश में 10 मार्च 2026 को10 से अधिक शहर अजमेर सहित जयपुर, जोधपुर, कोटा, सीकर, बीकानेर, चूरू, दौसा, भीलवाड़ा, बाड़मेर, हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर में पासपोर्ट कार्यालय व डाकघर को बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। इससे पहले जनवरी-फरवरी में अजमेर में कलक्ट्रेट, दरगाह व सेशन कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकियां मिलीं थी। जिसमें ई-मेल के जरिए एक ही पैटर्न पर धमकियां भेजी गईं। हालांकि जांच में अब तक तमाम धमकियां फर्जी निकली।अजमेर की तरह जयपुर में राजस्थान हाई कोर्ट. श्रीगंगानगर के जिला एवं सत्र न्यायालय और अब 13 अप्रेल को जयपुर विधानसभा, हाईकोर्ट व अन्य जिलों के सेशन कोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई। खास बात यह है कि दिसम्बर 2025 में भी जयपुर, अजमेर में इसी तरह की 15-20 धमकियां मिल चुकी हैं, जो एक रिपीट पैटर्न की ओर इशारा करती हैं।

आतंकी गतिविधि ने बढ़ाई चिंता

बम धमाकों की धमकियों के बीच कुछ ऐसे मामले भी सामने आए, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी। नागौर के थांवला क्षेत्र में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री की बरामदगी के बाद हरियाणा के अम्बाला में अजमेर निवासी अली अकबर को दो साथियों संग 2 किलो आरडीएक्स के साथ पकडे जाना और पूछताछ में हनुमानगढ़ को दहलाने की बड़ी साजिश का खुलासा भी बड़े खतरे का संकेत है। ऐसे में इनको नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

टीम के लौटने पर बढ़ेगा अनुसंधान

सिविल लाइंस थानाप्रभारी शम्भू सिंह ने बताया कि अजमेर कलक्ट्रेट-दरगाह और सेशन कोर्ट को धमकी के तीन प्रकरण दर्ज हैं। इसके बाद के मामले इन प्रकरणों में ही मर्ज कर दिए है । दिल्ली में पकड़े गए संदिग्ध से पूछताछ के लिए उप निरीक्षक गिरीराज के साथ में साइबर टीम दिल्ली गई हैं। टीम के लौटने के बाद ही प्रकरणों में अनुसंधान आगे बढ़ सकेगा।

आरोपी पकड़ से दूर

अधिकांश मामलों में आरोपी अज्ञात हैं और जांच साइबर ट्रैकिंग पर निर्भर है। ईमेल, वर्चुअल नेटवर्क के इस्तेमाल से आरोपियों की गिरफ्तारी चुनौती बनी हुई है। अजमेर में धमकियों का आंकड़ा 7 से ज्यादा हो चुका है लेकिन सिविल लाइंस थाने में दर्ज 3 मुकदमे अब भी बेनतीजा है।

धमकियों के पैटर्न का हो विश्लेषण

मौजूदा हालात में आवश्यकता है कि साइबर ट्रेसिंग क्षमता मजबूत की जाए, धमकियों के पैटर्न का विश्लेषण किया जाए। गुप्तचर एवं विशेष शाखा को आधुनिक तकनीकी संचार साधनों का प्रशिक्षण दिया जाए। साथ में मैन पावर के साथ-साथ माइंड पॉवर को तरजीह दे। फर्जी धमकी फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई भी जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

सुरेन्द्र कुमार भाटी, सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक

इनका कहना है...

सिविल लाइंस थाने की टीम को दिल्ली भेजा है। हालांकि पकड़े गए आरोपी की आईडी अजमेर को दी गई धमकियों से मेल नहीं खा रही है लेकिन दिल्ली पुलिस के ट्रेसिंग पैटर्न और आरोपी के पकड़ने के तरीके को समझा जा सकता है।

-हिमांशु जांगिड़, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर