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RBSE Administrator:मंत्री संभालेंगे बोर्ड की कमान, रीट पेपर लीक बड़ी चुनौती

1956-57 गठित माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में यूं तो स्थाई अध्यक्ष की नियुकि होती है। बोर्ड में पहली बार स्वतंत्र रूप से आइएस को लगाया प्रशासक।

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rbse exam 2021-22,rbse administrator

आज 11 बजे RBSE के 5 वीं और 8वीं के परिणाम उदयपुर से ऑनलाइन होंगे जारी ।

अजमेर. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में पहली बार आईएएस को स्वतंत्र रूप से आईएएस को प्रशासक लगाया गया है। अब तक सरकार माध्यमिक शिक्षा निदेशक अथवा सम्भागीय आयुक्त को ही कार्यभार देती रही है।
1956-57 गठित माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में यूं तो स्थाई अध्यक्ष की नियुकि होती है। इसके तहत किसी शिक्षाविद को अध्यक्ष बनाया जाता रहा है। अध्यक्ष की मृत्यु अथवा कार्यकाल खत्म होने , इस्तीफा देने की इस्थित में प्रशासक की नियुक्ति होती है। जिसके तहत माध्यमिक शिक्षा निदेशक अथवा सम्भागीय आयुक्त को कार्यभार दिया जाता है।

पहली बार पूर्ण प्रशासक
सरकार ने पहली मर्तबा पुर्ण प्रशासक के तौर पर आईएएस लक्ष्मी नारायण मंत्री को जिमेदारी दी है। मंत्री हाल में आरएएस से पदोन्नत होकर आईएएस बने हैं। वे अब तक उदयपुर-राजसमन्द जिले में रजिस्ट्रार, नाथद्वारा मंदिर मंडल प्रशासक , सेटलमेंट अधिकारी और अन्य पदों पर रहे हैं। वे मूलत:: अजमेर के निकट कड़ेल के निवासी हैं।

अब तक रहे प्रशासक
तत्कालीन अध्यक्ष गोपेश्वर माथुर का कार्यकाल खत्म होने पर 1998-99 में ए मुखोपाध्याय प्रशासक रहे। 2007 में वी पी अग्रवाल के कार्यकाल के बाद जे पी चंदेलिया, दीपक उप्रेती, 2009 में भरत राम कुम्हार के अध्यक्ष पद से बर्खास्त होने पर अजमेर के पूर्व सम्भागीय आयुक्त महावीर सिंह, अतुल शर्मा प्रशासक रहे। 2014 में पूर्व अध्यक्ष पी सी वर्मा के इस्तीफा देने पर भवानी सिंह देथा, 2018-19 में माध्यमिक शिक्षा निदेशक रहे नथमल डिडेल और सौरभ स्वामी प्रशासक रहे। अब प्रो डी पी जारोली के बर्खास्त होने के बाद लक्ष्मी नारायण मंत्री को स्वतंत्र प्रशासक लगाया गया है।

स्थाई अध्यक्ष की नियुकि जरूरी
बोर्ड में मूलत: शिक्षाविद ही अध्यक्ष वनते रहे हैं। सरकार रीट पेपर आउट मामले में जंक्सन चलने और मई में प्रस्तावित रीट परीक्षा को देखते हुए फिलहाल कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। हालांकि स्थाई अध्यक्ष के लिए सर्च कमेटी का गठन जरूरी होगा। इसमें बोर्ड प्रबन्ध मंडल के द्वारा नामित दो सदस्य और सरकार का एक प्रतिनिधि होता है। यह आवेदन लेकर तीन अथवा पांच नाम का पैनल सरकार को सौंपता है। इसमें से किसी एक को अध्यक्ष बनाया जाता है।

करानी पड़ सकती है आंतरिक जांच
मंत्री को बतौर प्रशासक बोर्ड स्तर पर आंतरिक जांच करानी पड़ सकती है। नियमानुसार किसी घोटाले, पेपर लीक, एसीबी की कार्रवाई में सम्बंधित विभाग आंतरिक जांच कराता है। ताकि सरकार को रिपोर्ट सौंपने और अन्य दोषियों को चिन्हित करने में आसानी रहे।