
सुरेश शर्मा /कादेड़ा. क्षेत्र में ऐसे कई कुएं हैं जो बिना मुंडेर व चिनाई वाले हैं। मतलब कुएं के अंदर चारों ओर पक्की चिनाई नहीं है। मुंडेर के अभाव में मिट्टी ढहने की सौ फीसदी आशंका रहती है। पक्का कुआं निर्माण में खर्चा अधिक आता है। मजदूरी, निर्माण सामग्री व संसाधन जुटाना मुश्किल रहता है। महंगाई का जमाना है। इससे बचने के लिए किसान कच्चा कुआं खोदने को मजबूर हैं। क्षेत्र की जमीन पथरीली नहीं है।
बालू मिट्टी के चलते खुदाई आसानी से हो जाती है। भूजल स्तर भी अधिक गहरा नहीं है। खेत पर फसल सिंचाई के लिए कच्चे कुएं पर डीजल पम्पसैट का सहारा रहता है। कादेड़ा सहित आसपास के गांवों में कई कुएं ऐसे भी हैं जो बिना मडंरे व अनुपयोगी पड़े हैं। यहां हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। प्रशासन यदि सर्वे कराए तो हकीकत सामने आ जाएगी,लेकिन किसी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन चेतता है।
बीसलपुर विस्थापित कॉलोनी में बुधवार को कच्चे कुएं की मिट्टी ढहने से तीन श्रमिकों की मौत इसी का नतीजा माना जा सकता है। जानकारों के अनुसार इस क्षेत्र में ऐसे ही करीब सात-आठ कुएं और हैं है जो कभी भी ढह सकते हैं। इसके बावजूद भी पुनर्वास कॉलोनी के काश्तकार क्षतिग्रस्त कुओं से फसल सिंचाई कर जान जोखिम में डाल रहे हैं।
जमीन में मजबूती नहीं
पुनर्वास कॉलोनी बालू रेत के टीबों पर बसी हुई है। यहां के मकानों की नींव भी मजबूत नहीं मानी जा सकती। विस्थापित किसान कच्चे कुएं बनाने में रूचि अधिक ले रहे हैं। वजह साफ है कि कम खर्चे में मुनाफा अधिक। यहां की जमीन में नमी अधिक है। इसके चलते जमीन में मजबूती नहीं रहती। बारिश के समय मिट्टी अधिक बहती है। ऐसे में गहरे गड्ढे होना आम बात है।
गड्ढे कर छोड़े क्षेत्र के कई काश्तकारों ने कुएं की खुदाई तो करा दी,लेकिन पानी नहीं आने के चलते उन गहरे गड्ढों को खुला छोड़ दिया। इसकी जगह दूसरा कुआं खोद लिया। इन गड्ढों में मवेशियों के गिरने व मिट्टी ढहने की आशंका बनी हुई है।
प्रशासन ने कुएं का कराया समतल
बुधवार को मिट्टी ढहने से तीन श्रमिकों की मौत के बाद प्रशासन ने कुएं में मिट्टी भराकर समतल करा दिया। कादेड़ा नायब तहसीलदार राधेश्याम शर्मा व पटवारी विरेन्द्र व्यास ने मौके पर जाकर मुआयना किया। किसान देवकिशन कुमावत के कच्चे कुएं को जेसीबी की सहायता से मिट्टी से पाट दिया।
कच्चे कुओं का सर्वे कराकर काश्तकारों को पाबंद किया जाएगा। बुधवार को जो हादसा हुआ है। उसकी पुनरावृत्ति फिर से न हो। इसके लिए सतर्कता बरती जा रही है। क्षेत्र के बिना मंडेर व कच्चे कुओं को मिट्टी से पाटा जाएगा।
राधेश्याम शर्मा, नायब तहसीलदार कादेड़ा
Published on:
29 Dec 2017 12:11 pm
