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शिकारी के शिकंजे में फंसी मादा पैंथर को बचा फिर छोड़ा जंगल में

जंगल में मिली थी घायल, वन विभाग ने करवाया उपचार  

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शिकारी के शिकंजे में फंसी मादा पैंथर को बचा फिर छोड़ा जंगल में

शिकारी के शिकंजे में फंसी मादा पैंथर को बचा फिर छोड़ा जंगल में

अजमेर. माकड़वाली गांव के निकट पदमपुरा में सोमवार सुबह मादा पैंथर शिकारी के शिकंजे में फंस गई। वन विभाग के बचाव दल ने मादा पैंथर को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर उपचार किया। बाद में उसे टॉडगढ़ रावली के अभयारण्य में छोड़ दिया गया।
पदमपुरा गांव के पास नाला क्षेत्र में ग्रामीणों को सुबह पैंथर की दहाड़ें सुनाई दी। ग्रामीण नाला क्षेत्र में पहुंचे तो एक मादा पैंथर शिकंजे में फंसी नजर आई। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेसक्यू टीम पदमपुरा गांव में पहुंची। जयपुर चिडिय़ाघर से वरिष्ठ वनजीव चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविन्द माथुर भी हथियारों के साथ पदमपुरा पहुंचे। डॉ. माथुर ने मादा पैंथर को टे्रंकुलाइज करने के बाद उपचार किया। डॉ. माथुर ने बताया कि करीब २ साल उम्र की पैंथर के पैर में शिकंजे से मामूली चोट आई थी। सूचना पर जिला कलक्टर विश्वमोहन शर्मा, उप वन संरक्षक सुदीप कौर भी घटनास्थल पर पहुंचे।

अब टॉडगढ़ अभयारण्य में दहाड़ेगी

पदमपुरा के पास शिकार के कैचर से आजाद हुई मादा पैंथर को वन विभाग की टीम ने सोमवार शाम उपचार के बाद टॉटगढ़ अभरण्य में छोड़ दिया। अब यही उसका बाकी का जीवन बीतेगा। गौरतलब है कि अजमेर में टॉडगढ़ अभयारण्य में पहले से दर्जनों पैंथर मौजूद हैं। अब २ साल की मादा पैंथर की मां व एक मेल पैंथर (भाई) अब भी अजमेर के आसपास की पहाड़ी में विचरण कर रहे हैं। गत दिनों उन्हें भूडोल व गुढ़ा गांव के आसपास के ग्रामीण इलाकों में देखा गया था। रविवार रात माकड़वाली के निकट पदमपुरा गांव में शिकारी के कैचर में फंसने से मादा पैंथर जख्मी हो गई थी।