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आरएमएस घोटाला: डाक विभाग ने मुख्य अभियुक्त सहित दो को बर्खास्त किया

फ्रैकिंग मशीन के जरिए हुआ था एक करोड़ का घोटालाएक आरोपी अधिकारी की हो चुकी है मौत सीबीआई ने चार दर्ज किए थे मुकदमें

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भूपेन्द्र सिंह

अजमेर.डाक विभाग Postal Department राजस्थान (दक्षिणी क्षेत्र) में तहलका मचाने वाले रेल मेल सेवा (आरएमएस-जे डिवीजन) घोटाले RMS scam के मुख्य अभियुक्त main accused निमित्त चौधरी सहित एक अन्य डाक छटाई सहायक अनिल कुमार सिंह को डाक विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। साथ ही उनके परिलाभ जब्त करते हुए वसूली भी शुरू कर दी है। अनिल कुमार की सम्पत्ति को कुर्क करने की कार्रवाई भी जारी है। आरएमएस जे-डिवीजन के तहत अजमेर रेलवे स्टेशन के स्पीट पोस्ट सेंटर पर फ्रैंकिग मशीन के जरिए एक करोड़ रुपए का घोटाला वर्ष 2013-2014 में सामने आया था। इस मामले में cbi केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चार एफआईआर fir दर्ज की थी। मुख्य अभियुक्त निमित्त को एक मामले में सीबीआई अदालत ने विभिन्न धाराओं में अलग-अलग कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। अन्य मामले की सुनवाई अभी जारी है। अनिल ने अपनी बर्खास्तगी को लेकर विभाग में अपील दायर की है।

45 कर्मचारियों से हुई 17 लाख की वसूली
डाक विभाग आरएमएस जे-डिवीजन में लम्बे समय तक चले फ्रैकिंग मशीन घोटाले में विभाग ने लापरवाही का दोषी मानते हुए विभाग 45 अधिकारियों-कर्मचारियों को चार्जशीट जारी करते हुए कार्रवाई की। उनके वेतन भत्तों से 17 लाख रुपए की रिकवरी की गई। जांच के दौरान अनिल कुमार का तबादला डाक विभाग जोधपुर कर दिया गया। सीबीआई ने स्पीड पोस्ट सेंटर की पूर्व मैनेजन मोहनी गुप्ता,निमित्त चौधरी,पूर्व अधिकारी बी.एल.कुम्हार,पूर्व एसएसपी एन.के.बोहरा व विभाग के पूर्व असिस्टेंट पोस्टमास्टर मोहम्मद हनीफ के खिलाफ मुकदमा एफआईआर दर्ज की थी। मामला दर्ज होने के कुछ समय बाद ही विकलांग महिला अधिकारी मोहिनी गुप्ता की मौत हो गई थी।

पंजाब में खोली दुकान

मुख्य अभियुक्त अपनी महिला मित्र के साथ अजमेर से पंजाब तक स्कूटर से ही भाग गया और वहां जिरकपुर में जूते-चप्पल बेचने की दुकान भी खोली वह चली नहीं तो वह के जिरकपुर से जयपुर आ गया। पुष्कर में भी फरारी काटी।

यह है मामला
मुख्य अभियुक्त निमित्त चौधरी सहित एक अन्य डाक छटाई सहायक अनिल कुमार सिंह की ड्यूटी आरएमएस के रेलवे स्टेशन स्थित स्पीड पोस्ट सेंटर पर थी। यहा बल्क डाक बुकिंग पर फ्रैंकिग मशीन के जरिए टिकट लगाए जाते थे। बुकिंग कराने वाले से तो नियमानुसार टिकट राशि ली जाती थी लेकिन फ्रैंकिग मशीन में भी सही डाटा दर्ज किया जाता था लेकिन विभाग को जमा करवाए जाने वाली राशि में गड़बड़ करते हुए कम राशि जमा करवाई जाती और बाकी राशि का गबन किया जाता था। उदाहरण के लिए 50 हजार रुपए के टिकट फ्रैंकिग मशीन के जरिए लगाए तो विभाग को 5 हजार रुपए ही जमा करवाए जाते थे। निरीक्षण करने वाले अधिकारी भी लापरवाही बरते रहे और गबन का यह खेल लम्बे समय तक चलता रहा, इसमें कई बड़े अधिकारी भी शामिल रहे।

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