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RPSC:सितम्बर या अक्टूबर में हो सकती है आरएएस प्री. परीक्षा,आयोग जल्द करेगा फैसला

परीक्षा आयोजन में एक महीने से कम दिन हैं। प्रिंटिंग प्रेस से पेपर छपाई तक नहीं हुई है।

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rpsc exam

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रक्तिम तिवारी/अजमेर

राजस्थान लोक सेवा आयोग की आरएएस एवं अधीनस्थ सेवाएं (संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा सीधी भर्ती)-2018 पर संकट कायम है। आयोग की अधूरी तैयारियों को देखते हुए अगस्त में परीक्षा होनी मुश्किल है। ऐसे में सितम्बर या अक्टूबर में परीक्षा कराई जा सकती है। आयोग जल्द परीक्षा को लेकर फैसला करेगा।

आयोग ने 5 अगस्त को आरएएस प्रारंभिक परीक्षा-2018 कराना तय किया है। इसके लिए 5.10 लाख से ज्यादा आवेदन मिले हैं। परीक्षा के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आयोग में 74 दिन स्थाई ना कार्यवाहक अध्यक्ष है। परीक्षा आयोजन में एक महीने से कम दिन हैं। प्रिंटिंग प्रेस से पेपर छपाई तक नहीं हुई है। इसके अलावा पेपर प्रिंटिंग और अन्य कार्य बेहद गोपनीय होते हैं। स्थाई अथवा कार्यवाहक अध्यक्ष ही यह प्रक्रिया अंजाम देते हैं।

परीक्षा खिसकेगी आगे !

अधिकृत सूत्रों ने बताया कि अधूरी तैयारियों को देखते हुए आरएएस प्रारंभिक परीक्षा-2018 कराना मुश्किल है। अंदरूनी स्तर पर परीक्षा सितम्बर या अक्टूबर में कराए जाने पर विचार-विमर्श जारी है। सरकार और कार्मिक विभाग से भी आयोग की चर्चा हुई है। उच्च स्तर पर हरी झंडी मिलते ही आयोग इसका फैसला करेगा।

समय रहते देनी पड़ेगी सूचना
आयोग के आरएएस प्री. परीक्षा नहीं कराने की स्थिति में अभ्यर्थियों को समय रहते सूचना देनी जरूरी होगी। बाकायदा वेबपोर्टल और समाचार पत्रों में इसकी अधिसूचना जारी करनी होगी।

..तो इन परीक्षाओं पर भी असर

आयोग ने 2 सितम्बर को माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए प्रधानाध्यापक प्रतियोगी परीक्षा-2017 कराना तय किया है। इसके लिए 97 हजार 596 आवेदन मिले हैं। इसी तरह उप निरीक्षक (पुलिस) प्रतियोगी परीक्षा-2016 का आयोजन 7 अक्टूबर को होना है इसमें 4 लाख 66 हजार 282 अभ्यर्थी शामिल होंगे। आरएएस प्रारंभिक परीक्षा-2018 के सितम्बर या अक्टूबर में कराए जाने की स्थिति में इनकी परीक्षा तिथि भी बदली जा सकती है।

विद्यार्थियों ने नहीं दिखाई रुचि

लॉ कॉलेज में एलएलबी पाठ्यक्रम में हुए बदलाव को विद्यार्थियों का साथ नहीं मिला। कॉलेज ने बीते वर्ष नवम्बर और इस साल जनवरी-फरवरी में सेमिनार कराए। इनमें विद्यार्थियों की उपस्थिति गिनने लायक रही। लघु शोध प्रबंध इन्टरनेट पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार हुए। विद्यार्थियों ने केस स्टडी और डीड राइटिंग लेखन को भी ज्यादा तवज्जो नहीं दी। परीक्षा के दौरान किताबों के बजाय पास बुक पढऩे पर ही जोर रहा। इसके चलते नए पाठ्यक्रम पर सवाल खड़े हो गए।