
save girl child campaign
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
बेटियां परिवार और समाज के लिए अनमोल हैं इन्हें खिलखिलाने दो...यह काबिल बनकर जीवन में खुशहाली लाएंगी....तो आप गौरान्वित महूसस करेंगे....कुछ इस अंदाज में डॉ. रीना व्यास मिश्रा लोगों को समझाकर बेटियों को बचाने और पढ़ाने की मुहिम में जुटी हैं। उनकी लगन और मेहनत से अजमेर जिले और राज्य में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरुकता बढ़ रही है। वे निर्धन तबके की बालिकाओं की पढ़ाई में मदद भी कर रही हैं। उनके प्रयासों से बालक-बालिकाओं के लिंगानुपात में इजाफा हुआ है।
बदल रही परिवार की सोच
सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय में जूलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रीना ने बताया कि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में बेटियों को कम पढ़ाने और जल्द शादी करने की परम्पराएं हावी हैं। लेकिन पिछले तीन-चार साल में ग्रामीण इलाकों में स्कूल-पंचायत स्तर पर समझाइश में जुटी हैं। घरों में बुजुर्गों, महिलाओं और पुरुषों से बातचीत करने से परिवारों की सोच बदलने लगी है। अब कई विवाहिताएं और परिजन फोन कर बेटी पैदा होने की सूचना देते हैं।
अन्य शिक्षक भी करते मदद
डॉ. रीना हर साल निर्धन और पिछड़े परिवार की बेटियों की स्कूल, कॉलेज की फीस भी जमा कराती हैं। कई छात्राओं को सरकारी छात्रवृत्ति योजनाओं से जोड़ चुकी हैं। डॉ. सुनीता पचौरी, डॉ. मधु सिंह, डॉ.अवनी शर्मा, डॉ. मंजुला मिश्रा और डॉ. रेणू पूनिया भी आर्थिक सहयोग दे रही हैं।
बालक-बालिका में नहीं फर्क
उन्होंने बताया कि अभियान का व्यापक असर हुआ है। राजस्थान में प्रति 1 हजार बालकों पर बालिकाओं की संख्या 960 तक पहुंच गई हैं। यह आंकड़ा 2022 या इसके बाद होने वाली जनगणना में सामने आएगा। डॉ. रीना के अनुसार समाज अथवा परिवार मेंबालक-बालिकाओं में कोई फर्क नहीं है। शिक्षा से समाज में बालिकाओं-महिलाओं के प्रति नजरिया बदल रहा है, लेकिन अभी काफी कामकाज की जरूरत है।
दादा भी रहे हैं पक्षधर
डॉ. रीना के दादा पंडित रामकिशोर व्यास राजस्थान के दिग्गज राजनेता और पुड्डूचेरी के उपराज्यपाल रहे हैं। वे भी बालिका और महिला शिक्षा को बढ़ाने पर जोर देते थे। लिहाजा दादा से मिल पारिवारिक संस्कारों ने भी डॉ.रीना को महिला और बालिका शिक्षा को बढ़ाने और कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम के लिए प्रेरित किया है।
Published on:
02 Jan 2022 09:21 am
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