शहर के शिवालय मंगलवार को हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठे। सावन माह की शुरुआत के साथ पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। इस बार अधिकमास होने से श्रावण शुक्ल पूर्णिमा यानि 31 को रक्षाबंधन तक मंत्रोच्चार से रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, पूजन का दौर चलेगा। कावडि़ए पुष्कर और अन्य स्थानों से जल लेकर शिवालयों में अभिषेक करेंगे।
बन रहा अद्भुत संयोग
वैदिक पंचांग की गणना सौर और चंद्र मास के आधार पर होती है। चंद्र मास 354 और सौर मास 365 दिन का होता है। तीसरे साल यह अंतर 33 दिन का हो जाता है। इसे ही अधिक मास कहा जाता है। इसलिए इस बार सावन दो महीने का होगा।
होंगे रूद्रीपाठ, निकलेगी कावड़ यात्रा
सावन माह में लगातार 58 दिन तक शिवालयों में मंत्रोच्चार से रुद्रीपाठ, शृंगार, जलाभिषेक होंगे। पुष्कर सरोवर सहित कई स्थानों से कावड़ यात्रा निकाली जाएंगी। शहर और विभिन्न ग्रामीण इलाकों में प्रसादी के दौर चलेंगे।
यह हैं शहर के प्रमुख शिवालय
झरनेश्वर महादेव, कोटेश्वर महादेव मंदिर, सूरजकुंड मदार गेट, आंतेड़ महादेव मंदिर, रामगंज, केसरगंज, वैशाली नगर, कोटड़ा , आगरा गेट शिवालयसावन में इतने सोमवार
जुलाई- 10, 17, 24 31
अगस्त- 07, 14, 21, 28
अरावली की पहाड़ी में स्थापित है प्राचीन झरनेश्वर महादेव मंदिर
ख्वाजा साहब की दरगाह अंदरकोट से सटी अरावली पर्वतमाला में 600 साल पुराना झरनेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यहां जाने के लिए आधा किलोमीटर पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता है। अजमेर में सबसे पहले इसी मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू होती है। यहां भगवान महादेव बालरूप में विराजमान हैं। युवा स्वरूप मदार गेट पर शांतेश्वर महादेव मंदिर तथा नया बाजार के शिवबाग में राठौड़ स्वरूप को स्थापित किया गया है। झरनेश्वर महादेव सेवा समिति के तत्वावधान में मंदिर में सावन माह के अलावा सालभर तक पूजा-अर्चना, अभिषेक और अन्य कार्यक्रम होते हैं।