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गजब का फर्जीवाड़ा..कागजों में पांच साल चल गई स्कीम, सरकार को नहीं लग सकी भनक

पांच साल से दवा विवरण प्रपत्र दिए जाने के आदेशों को रफा-दफा किया जाता रहा है।

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govt scheme runs in paper

govt scheme runs in paper

मनीष सिंह चौहान/ब्यावर।

सरकार अपनी योजनाओं के प्रति कितने सतर्क और सचेत है इसका नमूना ब्यावर में देखने को मिलेगा। निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच साल पूर्व नि:शुल्क दवा योजना काउंटर से मरीजों को दवा विवरण प्रपत्र दिए जाने के आदेश आज तक फाइलों से बाहर नहीं निकल सके हैं।

पांच साल में एक बार भी इन आदेशों की पालना नहीं हुई, जबकि इन आदेशों की पालना कराकर रिपोर्ट निदेशालय भेजे जाने के आदेश हर माह जारी हो रहे हैं, लेकिन इन आदेशों की पालना कराना कभी नि:शुल्क दवा योजना प्रभारी या अस्पताल अधीक्षक ने मुनासिब नहीं समझा।

इसी कारण फार्मासिस्ट या कम्प्यूटर ऑपरेटर ने इन आदेशों को तवज्जो नहीं दी। पांच साल से दवा विवरण प्रपत्र दिए जाने के आदेशों को रफा-दफा किया जाता रहा है। इसी कारण इसकी सफल क्रियान्विति नहीं हो रही है।
निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राजस्थान सरकार के निदेशक (जन स्वास्थ्य) ने 2 अक्टूबर 2012 को आदेश जारी किए थे कि नि:शुल्क दवा योजना काउंटर पर आने वाले हर मरीज को दवा के साथ ही दवा विवरण प्रपत्र भी दिया जाएगा।

इन आदेशों के बाद 18 नवम्बर 2016 को फिर आदेश जारी हुए प्रदेश के किसी अस्पताल में दवा विवरण प्रपत्र मरीजों को नहीं दिए जा रहे हैं। यह मामला गंभीर है। इस मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी थी। इस मामले की कुछ दिनों तक जांच हुई, लेकिन कहीं पर भी प्रपत्र दिए जाने की शुरुआत नहीं हो सकी।

क्या है दवा विवरण प्रपत्र...
सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवा योजना के काउंटरों को ई-औषधि सॉफ्टवेयर से जोड़ा गया। इसके बाद अस्पताल में आने वाले हर मरीज को किस काउंटर से कौनसी दवा मिली, किस चिकित्सक ने देखने के बाद किस मरीज को किस बीमारी की कितने दिनों की दवा लिखी गई। मरीज का रजिस्टे्रशन नम्बर, दवा काउंटर पर कौन सी दवा थी या नहीं। दवा का बैच नम्बर, एक्सपायरी डेट सहित दवाओं की संख्या कौन सी दवा मरीज को नहीं मिली। इन सभी का प्रपत्र बनाकर मरीजों को दिया जाने के आदेश दिए गए थे।

नेट की रहती है समस्या
सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवा योजना पर लगे कम्प्यूटर व प्रिंटर सालों पुराने हैं। इन पर नेट की व्यवस्था बराबर नहीं रहती। कई कम्प्यूटर सेट एक दूसरे से कनेक्ट हुए नहीं है। इसी कारण योजना प्रदेश में लागू नहीं हो पा रही।

स्टाफ ही नहीं है...
नि:शुल्क दवा योजना पर फार्मासिस्ट, हेल्पर व कम्प्यूटर ऑपरेटर पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। अकेले अमृतकौर चिकित्सालय में दवा काउंटरों पर हेल्पर नियमों के विपरित दवा वितरित करते हैं। ऑपरेटर दूसरे कार्यों में लगे हैं। इसी कारण निदेशालय के आदेशों की पालना नहीं हो रही।

ऐसे तो लग जाएगी कतारें
कम्प्यूटर ऑपरेटर का कहना है कि पहले ही यहां सालों पुराने कम्प्यूटर व प्रिंटर लगे हुए हैं। जो सही चलते तक नहीं हैं। ऐसे में यदि यहां मरीजों को दवा विवरण प्रपत्र दिए जाने लग जाएंगे तो दवा काउंटरों पर मरीजों की कतारें लग जाएगी।

स्टोर में पड़ी है स्टेशनरी
हर साल दवा विवरण प्रपत्र के लिए मुख्यालय से स्टेशनरी भेजी जाती है, लेकिन यह स्टेशनरी स्टोर की शोभा बढ़ा रही है। इन स्टेशनरी को कर्टन से बाहर निकाला तक नहीं गया है।

मरीजों को दवा विवरण प्रपत्र दिए जाने के ऐसे कोई आदेश हैं इसकी जानकारी मुझे नहीं है।

डॉ. एम. के. जैन, पीएमओ, अमृतकौर चिकित्सालय ब्यावर