
अजमेर-पुष्कर के बीच घाटी मार्ग। पत्रिका फाइल फोटो
अजमेर। पुष्कर घाटी में टनल बनाने प्रस्ताव कागजों से बाहर नहीं निकल पाया। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की बजट घोषणा के बाद सर्वे हुआ पर टनल को घाटे को सौदा बताने से प्रस्ताव अटक गया। आठ साल में टनल बन जाती तो घाटी में हादसे नहीं होते। साथ ही वैकल्पिक रूट भी तैयार हो जाता।
साल 2018 में तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे ने अजमेर-पुष्कर के बीच आवागमन की सुविधा एवं दुर्घटना से बचाव के तहत टनल निर्माण की घोषणा की थी। इसके लिए 55 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए। अजमेर विकास प्राधिकरण ने टनल की लिए डीपीआर तैयार करने के लिए वेप्कोस लिमिटेड को 24 जून 2018 को 168 लाख रुपए का ठेका दिया। कम्पनी ने निरीक्षण रिपोर्ट 5 नवम्बर 2018 को सौंप दी थी।
कंपनी रिपोर्ट में एलाइमेंट-1 में टनल की लम्बाई 2.4 किलोमीटर बताई गई। जबकि पुष्कर घाटी पर रोड की वास्तविक रोड की लम्बाई 2.1 किमी है। डीपीआर में इसका आधार 2.4 किमी माना गया। 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दूरी तय करने और 3 मिनट जाम और टर्निंग बताए गए। एडीए के आंतरिक परीक्षण में टनल का लाभ-लागत अनुपात (बेनीफिट कॉस्ट रेशियो कंस्ट्रक्शन ) के अनुरूप नहीं मिला।
-11 किमी दूरी है अजमेर-पुष्कर के बीच
-58 नंबर राष्ट्रीय राजमार्ग का है हिस्सा
-2.5 किमी का है अरावली में घाटी मार्ग
-15 से 18 हजार वाहनों की रोजाना आवाजाही
-01 से 05 औसतन हादसे होते रहे हैं प्रतिमाह
नौसर घाटी से पुष्कर चुंगी चौकी तक घाटी मार्ग को चौड़ा करने (फोरलेन) के लिए 2026-27 के बजट में राज्य सरकार ने लगभग 12 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसके तहत 6 किमी के दायरे में सड़क सुदृढ़ीकरण और चौड़ाई बढ़ाई जानी है।
पुष्कर घाटी में दशकों बाद भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं, जबकि इस दौरान घाटी में ट्रैफिक कई गुना बढ़ गया है। असुरक्षित घुमाव व भारी वाहनों की आवाजाही के साथ सड़क सुरक्षा संकेतकों की कमी से पुष्कर घाटी में कई बार सवारियों से भरी बस, निजी व अन्य वाहनों के गहरी खाई में गिरने की कई दर्दनाक घटनाएं हो चुकी हैं।
पुष्कर-अजमेर मार्ग पर सांझी छत तक करीब दर्जन भर ब्लाइंड कर्व होने के बावजूद न तो संकेतक हैं और न ही सुरक्षात्मक उपाय। घाटी के सड़क मार्ग पर केवल दो फीट की रिटेनिंग वॉल बनी हुई है। घाटी से उतरते समय क्रॉसिंग वाहनों से दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। इसके अलावा घाटी से दिन-रात बजरी से भरे डम्पर, ट्रक एवं स्लीपर कोच बसों की भी निरंतर आवाजाही बनी रहती है।
पुष्कर घाटी में भारी वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगाने तथा असुरक्षित घुमावों पर सूचना बोर्ड व सुरक्षा के अन्य उपाय करने के लिए जिला कलक्टर को निर्देशित किया गया है।
-सुरेश सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री
Updated on:
20 Apr 2026 09:01 am
Published on:
20 Apr 2026 09:00 am
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