
सर्दियों में सुहाने लगा तिल का तेल
दिनेश कुमार शर्मा
अजमेर.
तिल का तेल यानी सर्दियों में अमृत। इस तेल में कई पोषक तत्वों के साथ औषधीय गुण होने से आज भी अधिकांश घरों में इसे सर्दियों में उपयोग किया जाता है।
यही कारण है कि सर्दी बढऩे के साथ ही शहर में जगह-जगह घाणी नजर आने लगी हैं। इन पर कहीं विद्युत मोटर से तो कहीं बैल के जरिए और कहीं मोटरसाइकिल आदि का उपयोग कर तिल का तेल निकाला जा रहा है।
घाणी के तेल की बरसों पहले रसोईघर तक मजबूत पहुंच थी। इसमें शुद्धता की गारंटी अधिक रहती थी। आजकल रिफाइंड खाद्य तेलों ने सस्ता और सुलभ होने से रसोई में घुसपैठ कर ली है।
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ऐसे में तिल और सरसों आदि के तेल का उपयोग घटा है, लेकिन आज भी शहर में ऐसे अनेक लोग हैं, जो सर्दियों में घाणी का तेल ही काम में लेते हैं।
अजमेर में वैशाली नगर, क्रिश्चियनगंज, आदर्श नगर, जयपुर रोड स्थित आरपीएससी कार्यालय के समीप घाणी से तेल निकाला जा रहा है।
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सेहत के साथ स्वाद भी
क्रिश्चियनगंज में घाणी संचालिका तीजाबाई (83) ने बताया कि तिल का तेल जहां सेहत का खजाना है, वहीं यह भोजन के स्वाद को बढ़ा देता है।
सर्दियों में यह खीचड़ा, मक्की घाट, डोकला, मक्के और बाजरे की रोटी, आलू और मैथी के परांठे सहित मैथी के लड्डू बनाने में अधिक प्रयोग में लिया जाता है।
तेल इन दिनों 300 रुपए किलो बिक रहा है। गत वर्ष इसका भाव 275 रुपए करीब था, लेकिन तिल महंगे होने सहित अन्य खर्चों के चलते इसके भाव बढ़े हैं।
उन्होंने बताया कि 10 किलो तिल में करीब साढ़े 4 किलो तक तेल निकलता है। पहले जहां लोग सर्दियों में तिल के तेल का पीपा खरीदते थे, वहीं अब किलो, 2 किलो तक ही खरीद पा रहे हैं।
चिकित्सकीय लाभ
चिकित्सकीय प्रणालियों के अनुसार तिल का तेल तनाव से संबंधित लक्षणों को शांत करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद ऑक्सीकरण रोधक और बहु असंतृप्त वसा रक्तचाप नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
शरीर और सिर की मालिश में भी इसे बहुत लाभदायक माना जाता है। इससे बालों का झडऩा कम होता है और उनमें चमक आती है।
आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग में भी इसे काम में लिया जाता है। तिल के तेल में विटामिन के, विटामिन बी-कॉम्पलेक्स, विटामिन डी, विटामिन ई, फास्फोरस और बालों के लिए लाभकारी प्रोटीन होते हैं।
अन्य देशों में भी उपयोग
चीनी, कोरियाई और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए तिल के तेल का इस्तेमाल किया जाता है।
दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी खाने में तिल के तेल का अधिक उपयोग किया जाता है।
Published on:
09 Dec 2019 08:08 am
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