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सुरेश लालवानी/अजमेर।
अभी कुछ दिनों की ही बात है । सोशल मीडिया पर सिंधियों की विशेषताओं को लेकर एक वीडियो वायरल हो रखा है। दरअसल वह किसी चैनल का एक कार्यक्रम था जिसका नाम है पब्लिक है सब जानती है। किस शहर में शूट किया गया इसकी पहचान तो नहीं हो पाई लेकिन लोगों की बातचीत और बैकग्राऊंड किसी महानगर होने का आभास दे रहा है।
यह वीडियो मेरी पत्नी को उसकी दुबई मेंं रहने वाली एक सहेली ने फारवर्ड किया है। हो सकता है वहीं पर शूट किया गया हो। मुझे काफी इंटरेस्टिंग लगा और होजमालो का काफी मसाला भी नजर आया तो सोचा आपसे भी शेयर कर ही लूूं।
50 लोगों से बातचीत
इस कार्यक्रम के ऐंकर ने किसी बड़े मॉल टाइप सार्वजनिक स्थान पर आने जाने वाले तकरीबन 50 लोगों से बातचीत की और उनसे सीधा सवाल किया कि सिंधियों को लेकर उनके दिमाग में क्या छवि बनी हुई है। जवाब बस एक दो शब्दों में ही देना था। आपको उनके रिव्यू सुनकर काफी मजा भी आएगा और थोड़ा बहुत सिंधी होने पर गर्व भी महसूस हो सकता है। खास बात यह है कि जिनसे सवाल किया गया था वे सिंधी नहीें थे। इनमें से दो-तीन लोगों ने तो सिंधियों को नहीं जानने का तर्क देते हुए कोई टिप्पणी ही नहीं की। तो तैयार हो जाइए यह जानने के लिए दुनिया के लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं।
बिजनेसमैन और मेहनती
सबसे ज्यादा कॉमन विश्लेषण है बिजनेसमैन और मेहनती। अब आते है उन कमेंट्स मेरे कहने का मतलब उन कॉम्पलीमेंट्स पर जो काफी मजेदार है। हैंडसम और स्मार्ट, मनी माइंडेड, वेल एज्यूकेटेड, बढिय़ा नेचर और बातचीत, मस्तमौला, नो- टेंशन, दोस्ताना व्यवहार, पार्टी एनीमल, हिसाब किताब में माहिर, पैइइसा, पापड़, कढ़ी -चावल, हंसमुख, किसी भी समय मददगार, बॉरगेन पॉवर, अल्पसंख्यक, लाल मुहिंजी पत रखजां भला, पोलाइट, , सुठो-सुठो। अब कुछ कड़वे वचन भी। एकदम चालू, कंजूस, इनसे पंगा नहीं लेना और फूडी।
कंजूस, चालू और फूडी
मेरे हिसाब से इस कार्यक्रम में सिंधियों को जो भी विश्लेषण दिए गए वे कमोबेश एकदम सटीक हैं। अब कंजूस, चालू और फूडी पर कुछ लोग नाराज हो तो हो लेकिन सच्चाई तो सच्चाई है भाई। सबकी अपनी अपनी कल्चर है और अपने अपने तौर तरीके हैं।
Published on:
16 Sept 2018 05:10 pm
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