
स्मार्ट सिटी के बीच बरसों से आबाद 'स्लम सिटी', अधिकारी हटाने में नाकाम
अजमेर. स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर में हो रहे करोड़ों के निर्माण और सौंदर्यीकरण के बीच ही स्लम-सिटी भी आबाद है। शहर के ब्यावर रोड राजकीय महाविद्यालय के बाहर फुटपाथ पर खजूर की झाड़ू बनाने वाले परिवार बसे हुए व उनके बच्चे सड़कों पर खेलते-दौड़ते नजर आते हैं। सालों से यहां का फुटपाथ मिनी स्लम सिटी का रूप लिए हुए है। फुटपाथ पर अवैध रूप से काबिज झुग्गी-झोपडि़यों में रहने वाले इन लोगों को प्रशासन नहीं हटा सका है। हालांकि यह लोग प्रशासन द्वारा अन्यत्र व्यवस्था करने पर यहां से हटने को तैयार हैं।
30 साल से बसे परिवार. . .राजकीय महाविद्यालय की दीवार के सहारे हजारी बाग चौराहे तक करीब 35-40 परिवार अपने पूरे लवाजमे और साजो-सामान के साथ आबाद हैं। वे यहां 30 सालों से अधिक समय से रहने का दावा भी करते हैं। इनका मुख्य काम खजूर की झाड़ू और बच्चों के क्रिकेट बैट आदि बनाकर बेचना है। सालों से हर मौसम में यह परिवार यहीं डेरा डाले रहते हैं।
हादसे की आशंकाअजमेर- अहमदाबाद नेशनल हाइवे-8 की इस सड़क पर प्रतिदिन हजारों वाहनों की आवाजाही दिन-रात रहती है। इसी क्षेत्र में निजी बसों का जमावड़ा, रोडवेज बस का अस्थायी स्टैंड व ट्रेवल्स एजेंसी वालों सहित अन्य छोटा-मोटा काम करने वालोंं दुकानें व कियोस्क भी बहुतायत में हैं।इन सबके बीच सड़क किनारे बसे इन परिवारों को हमेशा वाहनों से खतरा बना रहता है। पूर्व में परिवारों के लोग दुर्घटना का शिकार भी हो चुके हैं।
अतिक्रमण की मार, गुम हुआ फुटपाथनेशनल हाइवे संख्या संख्या आठ पर जीसीए चौराहे से दौराई तक अतिक्रमण हैं। रेलवे अस्पताल तक खानाबदोश परिवारों के डेरे हैं। दूसरी ओर वेंडिंग जोन की आड़ में अतिक्रमण है। रोडवेज बस स्टॉप के पास अजमेर-ब्यावर रूट की जीपों व निजी बसों का जमावड़ा रहता है। जौंसगंज चौराहे से लेकर रामगंज चौराहे तथा एचएमटी से दौराई तक दोनों ओर सड़क पर बेतहाशा अतिक्रमण हैं।
भीलवाड़ा, बिजयनगर, आसींद के मूल निवासी
यहां बसे बागरिया समाज के यह लोग मूलत: बिजयनगर और आसींद के आसपास के मूल निवासी हैं। कई सालों से इनके परिवार के लोग काम-धंधे के लिए यहां आकर रहने लगे। खुद के वाहन भी हैं जो झोपडि़यों में ही खड़े किए जाते हैं।
मुख्यमंत्री तक की फरियादझुग्गियों में स्थाई बसेरा बनाकर सालों से रह रहे हैं। सभी जातियों के लिए आवास व्यवस्था सरकार ने की लेकिन झाड़ू बनाने वाले बागरिया समाज के लोगों के लिए कभी कोई योजना नहीं बनाई।
ओम, आगूंचायहां से हटने को तैयार हैं। बशर्ते प्रशासन कोई जगह दे। दो साल पहले कुछ लोग फार्म भरवा कर ले गए आधार कार्ड भी दिए थे। मकान का आश्वासन दिया लेकिन कुछ नहीं हुआ।
कैलाश, हुरड़ा25 साल से यहां रह रहे हैं। सड़क किनारे हमेशा खतरा बना रहता है। हमें भी अपनी छत चाहिए। प्रशासन मदद करे तो हमें अपना घर मिल सकता है।
रोशनी, भीलवाड़ाबच्चों को पढ़ाने-लिखाने के लिए जाते हैं तो आधार कार्ड मांगते हैं। जबकि हमारे गांव भीलवाड़ा, आसींद, आगूंचा आदि क्षेत्र के हैं। ऐसे में बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं मिलता।
केली, आसींद
Published on:
16 Jul 2023 11:04 pm
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