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मानस परिवर्तन, नैतिक मूल्यों की कथा है सुंदरकांड. . .

- कथा वाचक अश्विन पाठक से राजस्थान पत्रिका की विशेष बातचीत - 23 साल से निरंतर कर रहे सुंदर कांड-हनुमान चालीसा रामचरित मानस का सातवां अध्याय सुंदरकांड है। इसमें हनुमान जी की चरित्र कथा है। धरती पर हनुमान आज भी अजर-अमर हैं। रामचरित मानस के 16वें दोहे की तीसरी चौपाई में हनुमानजी के अमरत्व के प्रमाण हैं। सीता माता ने श्रीलंका में हनुमानजी को अमरत्व का वरदान दिया था।

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अजमेर

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Dilip Sharma

Sep 30, 2023

मानस परिवर्तन, नैतिक मूल्यों की कथा है सुंदरकांड. . .

मानस परिवर्तन, नैतिक मूल्यों की कथा है सुंदरकांड. . .

दिलीप शर्मा

अजमेर. रामचरित मानस का सातवां अध्याय सुंदरकांड है। इसमें हनुमान जी की चरित्र कथा है। धरती पर हनुमान आज भी अजर-अमर हैं। रामचरित मानस के 16वें दोहे की तीसरी चौपाई में हनुमानजी के अमरत्व के प्रमाण हैं। सीता माता ने श्रीलंका में हनुमानजी को अमरत्व का वरदान दिया था। इसका वर्णन चौपाई में भी अजर-अमर निधि सुद हो में उल्लेखित है। सुंदरकांड ना केवल भारतीय जनमानस बल्कि विदेशों में भी उतने ही भक्तिभाव से कहा-सुना जाता है। ढाई दशक से सुंदरकांड में ही आकंठ डूबे रहने वाले कथा वाचक संत अश्विनी पाठक से राजस्थान पत्रिका से हुई बातचीत के अंश।

प्रश्न - सुंदरकांड कथा वाचन कब से शुरू किया ?

उत्तर - एक जून 2000 से जयश्रीराम सुंदर कांड परिवार की स्थापना की। पिछले 23 सालों से और 8522 दिनों से अखंड सुंदरकांड का निशुल्क वाचन किया जा रहा है। भारत के सभी राज्यों सहित आस्ट्रेलिया, केन्या, अमरीका, इंग्लैंड दक्षिण अफ्रीका में सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ निरंतर करता रहा हूं।प्रश्न - सुंदरकांड का ही वाचन क्यों ?

उत्तर - रामचरित मानस के सात कांड में से पांचवें अध्याय में सुंदरकांड में ही हनुमान जी महाराज का चरित्र वर्णन है। इसमें सीता माता ने अमरत्व का वरदान दिया था। इसका उल्लेख शास्त्रों में होने से ही यह प्रमाणित है कि हनुमानजी आज भी अजर-अमर हैं।प्रश्न - सुंदरकांड का समाज पर क्या प्रभाव है ?

उत्तर - यह मानस परिवर्तन व नैतिक मूल्यों की कथा है। यह जीवन की सफलता का सिद्ध मंत्र है। सुंदर कांड में करीब 1400 चौपाईयां हैं। एक भी जीवन में उतार लें तो जीवन सफल है।प्रश्न - सुंंदरकांड का मूल मंत्र या अर्क क्या है ?

उत्तर - सुंदरकांड दो शब्दों में निहित है। हनुमान जी ने स्वयं सिद्ध की है। मानस कांड में समयानुसार परिस्थितियों के बदलाव होते रहते हैं। अहंकार को त्याग कर छोटे बनो, अहंकार छोड़ो। दो शब्द. . 'छोटे बनो' यही सुंदरकांड का मूल मंत्र है। रामचरित मानस में भी अति लघुरूप धरे हनुमाना यानि लक्ष्य पाने के लिए अति विराट व्यक्तित्व वाले हनुमान कई जगह सूक्ष्म रूप धारण कर पहुुंचे। सुरसा मुख से गुजरने व अशोक वाटिका में जाने के लिए हनुमानजी ने सूक्ष्म रूप धरे। आज समाज में हर रिश्ते में टकराव के हालात हैं। कोई छोटा नहीं होना चाहता। इसी कारण लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। केवल मछली की आंख पर नजर रखनी होगी. .अहम त्यागना होगा।

प्रश्न - कथाओं का व्यावसायीकरण होने लगा है ?

उत्तर - कथा बांटने की चीज है, बेचने की नहीं। इसका उपयोग स्वार्थ सिद्धि, संबंध बनाने या व्यवसाय के लिए नहींं होना चाहिए। जहां पैसोंं या दान आदि के नाम पर राशि जुटाकर आयोजन होता है वहां मैं नहीं होता ।

प्रश्न - युवाओं व समाज के लिए क्या संदेश ?

उत्तर - कथा आयोजन के दौरान प्राप्त दान-दक्षिणा की राशि 84 परिवारो को प्रत्येक माह के पहले गुरुवार को राशन किट देने में काम आती है। इसके साथ ही नर्बदा तट पर शाश्वत मारुति धाम में परिक्रमा करने वाले लोगों के लिए 24 घंटे भोजन व आवास की निशुल्क व्यवस्था रहती है। प्राप्त राशि से गीता प्रेस गोरखपुर से सुंदरकांड की पुस्तकें क्रय की जाकर नि:शुल्क वितरण किया जाता है। युवा पीढ़ी के लिए इतना ही कहूंगा कि रोजाना घर से निकलने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करें। फिर जीवन में परिवर्तन देखें।