
सुशील कंवर पलाड़ा- मानदेय से की साढे चार सौ महिलाओं की मदद, जिला परिषद को पहुंचाया लोगों को द्वार,सुशील कंवर पलाड़ा- मानदेय से की साढे चार सौ महिलाओं की मदद, जिला परिषद को पहुंचाया लोगों को द्वार,सुशील कंवर पलाड़ा- मानदेय से की साढे चार सौ महिलाओं की मदद, जिला परिषद को पहुंचाया लोगों को द्वार,सुशील कंवर पलाड़ा- मानदेय से की साढे चार सौ महिलाओं की मदद, जिला परिषद को पहुंचाया लोगों को द्वार,सुशील कंवर पलाड़ा- मानदेय से की साढे चार सौ महिलाओं की मदद, जिला परिषद को पहुंचाया लोगों को द्वार
अजमेर. बचपन से ही विधवा व जरूरतमंद महिलाओं को संघर्ष करते देख पीड़ा होती थी। मुझे लगता था कि मैं ऐसी महिलाओं की परेशानी कम करने में कैसे मददगार बनूं. . .अब यही मेरे जीवन का ध्येय है। यह भाव जिला प्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा ने रविवार को राजस्थान पत्रिका से विशेष बातचीत में व्यक्त किए।
पलाड़ा ने बताया कि पहले मुझे लोगों से बातचीत करने में झिझक होती थी। रुक-रुक कर बोलती थी। लेकिन विधायक और जिला प्रमुख बनने के बाद यह स्थिति बदल गई। गृहिणी रहते पहली बार चुनाव लड़ने का मौका मिला। बेटे शिवराज व शिवप्रताप भी छोटे थे। बाहर ज्यादा आना-जाना नहीं होता था। पति भंवर सिंह ने कहा कि जिला परिषद के वार्ड एक से टिकट मिला है. . .चुनाव लड़ना है। साल 2010 में चुनाव प्रचार के दौरान पति व परिवार के लोग साथ रहते थे। इसके बाद जब विधानसभा चुनाव लड़ा तो खुद ही मोर्चा संभाल लिया। रोजाना 20 से ज्यादा गांवों में लोगों से मिलती तो आत्मविश्वास बढ़ा। इसके बाद 2013 में विधानसभा पहुंची। अब आधे घंटे तक धाराप्रवाह भाषण दे सकती हूं।मानदेय से बेटियां परणाई. . .
मैंनेे बचपन में गांव में कई विधवा व जरूरतमंद महिलाओं को परेशानी में देखा है....बहुत पीड़ा होती थी। जब परिवार में कमाने वाला नहीं होता तो परेशानियां परिवार भुगतता है। तबसे ऐसों की ही मदद करने की ठानी। मुझे जो पहला मानदेय मिला उसे विधवा महिला की बेटी के विवाह में खर्च किया। विधायक बनने के बाद दायरा बढ़ा दिया। जरूरतमंदों के बच्चों को विवाह में सहायता कर रही हूं. . .आत्मिक संतोष मिलता है। । पलाड़ा अब तक 450 सौ से ज्यादा महिलाओं की मदद कर चुकी हैं।
मैं जाऊंगी जनता के पास....
गांवों कामकाज के लिए लोगों को कई किलोमीटर दूर जिला परिषद आना पड़ता था। परिषद में कई बार दिनभर बैठना पड़ा था। लोगों के पास किराए और अन्य खर्च के पैसे भी नहीं होते। मैंने इस प्रक्रिया को बदलने का फैसला किया। 'जिला परिषद आपके द्वार' कार्यक्रम शुरू किया। अभियान में असहाय परिवारों की चिरंजीवी योजना की राशि पंचायत समिति और जिला परिषद की तरफ से जमा होती है। जरूरतमंदों को राशन, बच्चों के जन्मदिन का केक काटने तथा लोगों को जानकारी देने का काम होता है।
मिले तो काम में लें अवसर
सुशील कंवर ने बताया कि मुझे जब-तब अवसर मिला परिवार-समाज की सेवा की। पति भंवर सिंह पलाड़ा, ससुर पीरू सिंह व सास भंवर कंवर सहित परिवार ने भी बहुत साथ दिया। इसलिए चाहे राजनीति हो या नौकरी कभी अवसर नहीं खोना चाहिए। मुझे संतोष है कि जीवन में समाज सेवा का मौका मिल रहा है।
Published on:
27 Mar 2023 12:34 pm
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