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राजकीय संग्रहालय की ‘धरोहर’ भगवान शिव की प्रतिमाएं

महाशिवरात्रि पर विशेष : आठवीं और दसवीं शताब्दी के शिवलिंग, लिगोद्भव की प्रतिमा भी शामिल- अजमेर के राजकीय संग्रहालय में रखे हैं शिवलिंग

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राजकीय संग्रहालय की ‘धरोहर’ भगवान शिव की प्रतिमाएं

राजकीय संग्रहालय की ‘धरोहर’ भगवान शिव की प्रतिमाएं

चन्द्र प्रकाश जोशी

अजमेर. शताब्दियां बदलती रहीं, लेकिन भगवान शिव की महिमा उत्तरोत्तर बढ़ती गई। हर शताब्दी में भगवान शिव की मूर्ति का आकार, मूर्ति के कुछ प्रतीक भले ही बदले, लेकिन आस्था में कभी कोई कमी नहीं आई। भगवान शिव की आठवीं शताब्दी तक की मूर्तियां आज भी पुरातत्व विभाग की ‘धरोहर’ बनी हुई हैं।

राजकीय संग्रहालय में आठवीं, दसवीं शताब्दी की शिव प्रतिमाएं संरक्षित हैं। भगवान शिव के विविध रूपों में ऐतिहासिक प्रतिमाएं पर्यटकों एवं आमजन के दर्शन के लिए सुरक्षित रखी हैं। राजस्थान पत्रिका में महाशिवरात्रि के मौके पर प्रस्तुत है प्रतिमाओं की तस्वीरें व ऐतिहासिक जानकारी :

लिंगोद्भव प्रतिमा : राजकीय संग्रहालय में 10 वीं शताब्दी की लिंगोद्भव प्रतिमा अवस्थित है। एक हिस्सा मामूली खंडित है। एक ही शिवलिंग में कई तरह की आकृतियां बनी हैं।

शिव पार्वती की प्रतिमा : संग्रहालय में 10 वीं शताब्दी की भगवान शिव एवं पार्वती की पाषाण प्रतिमा है। प्रतिमा के नीचे चक्रनुमा पहियों के सहारे दो देवियां भी नजर आ रही हैं।

भगवान शिव : 14 वीं से 18 वीं सदी के मध्य की भगवान शिव की प्रतिमा श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। काल खंड के अनुसार प्रतिमा ने कई काल खंड देखे हैं।

ब्रह्मा-विष्णु-शिव : त्रिमूर्ति के रूप में भगवान ब्रह्मा-विष्णु-महेश एक ही प्रतिमा में हैं। पहाड़नुमा आकृति के पाषाण पर भगवान ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश की प्रतिमा हैं।