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धौलपुर के आसमान में दिखा प्रेम और विरह का प्रतीक प्रवासी पक्षी कुरजां

शुभ समाचार: चंबल और बांधों के आसपास उतरते हैं झुंड, मुख्य रूप से जोधपुर में जमाते हैं डेरा - भोजन-पानी और सर्दी से बचाव के लिए तय करते हैं छह हजार किमी का सफर - बांधों-तालाबों में पानी होने से प्रवासियों पक्षियों से गुलजार रहेगा जिला प्रेम और विरह के प्रसिद्ध लोकगीतों के प्रतीक प्रवासी मेहमान पक्षी कुरजां का आगमन शुरू हो गया है। धौलपुर के आसमान पर भी कुरजां के झुंड उड़ान भरते देखे गए हैं। ये प्रवासी पक्षी धौलपुर और आसपास के इलाकों में भी डेरा डालते हैं। हालांकि, इनका मुख्य रहवास जोधपुर के खींच

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अजमेर

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Dilip Sharma

Sep 20, 2022

धौलपुर के आसमान में दिखा प्रेम और विरह का प्रतीक प्रवासी पक्षी कुरजां

धौलपुर के आसमान में दिखा प्रेम और विरह का प्रतीक प्रवासी पक्षी कुरजां

धौलपुर. प्रेम और विरह के प्रसिद्ध लोकगीतों के प्रतीक प्रवासी मेहमान पक्षी कुरजां का आगमन शुरू हो गया है। धौलपुर के आसमान पर भी कुरजां के झुंड उड़ान भरते देखे गए हैं। ये प्रवासी पक्षी धौलपुर और आसपास के इलाकों में भी डेरा डालते हैं। हालांकि, इनका मुख्य रहवास जोधपुर के खींचन व उसके आसपास का क्षेत्र होता है। प्रवासी पक्षी कुरजां के कुछ दिन पूर्व क्षेत्र में उड़ान भरते हुए गए थे। कुछ पक्षी चंबल के आस-पास और कुछ रामसागर, उर्मिला सागर अथवा पार्वती बांध के पास उतरते हैं। कुरजां कुछ दिन तक आकाश में उडते हुए अपने परंपरागत पड़ाव स्थल की पहचान एवं पूरी जांच पड़ताल करते हैं। उसके बाद कुछ ही दिनों में ये नीचे उतरेंगे। तापमान में गिरावट के साथ ही क्षेत्र में पक्षियों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।

खुले मैदान में डालते हैं डेरा

प्रवासी पक्षी कुरंजा का वजन करीब दो से ढाई किलो होता है। यह पानी के आसपास खुले मैदान और समतल जमीन पर ही अपना अस्थाई डेरा डालकर रहते हैं। इन पक्षियों का मुख्य भोजन वैसे तो जलीय घास होती है। ये पानी के पास पैदा होने वाले कीड़े- मकोड़े खाकर अपना पेट भरते हैं।

यूरेशिया और साइबेरिया से भरते हैं उड़ान

मध्य एशिया के कजाकिस्तान व मंगोलिया सहित साइबेरिया के बर्फ आच्छादित क्षेत्रों से करीब छह हजार किलोमीटर कर उड़ान भर कर यहां तक आने वाले कुरजां को इस बार जलाशयों में प्रचुर मात्रा में पानी के कारण खाद्य श्रंखला उपलब्ध हो सकेगी। पक्षी विशेषज्ञों को धौलपुर के आसपास के जलस्रोतों में वर्षा जल की अच्छी आवक होने से शीतकालीन प्रवासी पक्षियों की तादाद इस बार ज्यादा बढऩे की उम्मीद है।

चंबल किनारे पिनाहट के आसपास मुख्य प्रवास

कुरजां का मुख्य आश्रयस्थल धौलपुर के निकट उत्तर प्रदेश के पिनाहट व उसके आसपास होता है। यहां चंबल के पाट अधिक बड़े हैं। ऐसे में यह पक्षी मुख्यरूप से वहां डेरा जमाता है। धौलपुर व उसके आसपास भी कुछ स्थानों पर इन्हें देखा जा सकता है।

यह पक्षी करते हैं धौलपुर में प्रवास

इंडियन स्कीमर, ब्लैक-बेल्ट टर्न और जनसंख्या में गिरावट वाला पक्षी इजिप्शियन वल्चर समेत लुप्तप्राय पक्षी सारस क्रेन, ग्रेटर-स्पोटिड ईगल, रिवर टर्न यहां देखे गए हैं। जबकि संकटग्रस्त ब्लैक-हेडेड आईबिस, रिवर लेपविंग, ओरिएंटल डार्टर, डालमेशन पेलिकन और ब्लैक-नेक्ड स्टार्क भी यहां आते हैं।

इनका कहना है

जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी और प्रवासी पक्षी भी धौलपुर जिले में आएंगे। कुरजां का धौलपुर के आसमान में दिखना पारिस्थितिकी संतुलन के लिए शुभ समाचार है।
- राजीव तोमर, मानद वन्यजीव प्रतिपालक, धौलपुर