
मस्तिष्क की प्राथमिक जरूरत है अच्छी नींद-डॉ. दाधीच
अजमेर. अच्छी नींद, स्वस्थ मस्तिष्क की प्राथमिक जरूरत है। स्वस्थ मस्तिष्क आगे चलकर खुशहाल संसार की स्थापना करता है। यह विचार ही नहीं एक सच्चाई है, जिसे समझा जा सकता है, स्वयं महसूस किया जा सकता है।
अजमेर के वरिष्ठ पल्मोनोलोजिस्ट डॉ प्रमोद दाधीच ने वर्ल्ड स्लीप डे 18 मार्च 2022 के अवसर पर यह विचार रखे। डॉ दाधीच ने बताया कि वर्ल्ड स्लीप एसोसिऐशन इस वर्ष क्वालिटी स्लीप, साउंड माइंड, हैप्पी वर्ल्ड की सोच के साथ ही वर्ल्ड स्लीप डे मना रहा है।
उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर व्यक्ति अपने जीवन का एक तिहाई हिस्सा सोने यानी नींद में गुजार देता है। बचा हुआ दो तिहाई हिस्सा वह काम काज में बिताता है। इसे गहराई से समझा जाए तो व्यक्ति जीवन के जिस दो तिहाई हिस्से को काम करते हुए गुजारता है सही मायने में उस काम को सही ढंग से करने की सोच और शक्ति के लिए ही उसे स्वस्थ मस्तिष्क की जरूरत होती है और वह स्वस्थ मस्तिष्क उसे अच्छी नींद लेने से ही मिलता है।
डॉ दाधीच ने इसे और सरल और सहज तरीके से समझाया कि नींद की जरूरत बढ़ती उम्र के साथ कम होती जाती है। बुजुर्ग होने पर तो नींद टुकड़ों में आने लगती है।
उम्र अनुसार ऐसे घटता जाता है नींद का दायरा
-एक साल तक के बच्चे 16 से 18 घंटे तक सो लेते हैं।2 से 5 साल के बच्चे 12 घंटे।
- 5 से 10 साल के बच्चे 10 घंटे-10 से 18 साल तक के युवक 8 से 10 घंटे
-18 से अधिक आयु के युवक 6 से 8 घंटे-18 से 60 साल तक के वयस्क 6 घंटे की भरपूर नींद लेते हैं।
स्वस्थ मस्तिष्क के लिए सुबह जल्दी उठना बेहतर
डॉ दाधीच ने बताया कि अंधेरे के साथ हमारे शरीर में मेलेटोनिन नामक हार्मोन निकलता है वह हमें निद्रा की ओर ले जाता है उजाला होने के साथ यह हार्मोन कम होने लगता है। उन्होंने बताया कि रात्रि में 9 से 10 बजे के बीच सोना व सुबह 5 से 6 बजे के बीच उठ जाना स्वस्थ मस्तिष्क के लिए सबसे बेहतर होता है। 8 घंटे की क्वालिटी स्लीप व्यक्ति को पूरे दिन किए काम-काज का बेहतर परिणाम देती है, जिससे खुशहाल संसार का निर्माण होता है।
यह है निन्द्रा संबंधी बीमारी
निद्रा में बाधा किसी भी रोग का कारण हो सकती है। अगर सोते समय श्वास नली सिकुड़ने लगती है व शरीर में जाने वाली ऑक्सीजन कम होने लगती है तो मस्तिष्क परेशान होने लगता है। सोने के बावजूद अधूरी नींद के साथ जाग होती है जिससे पूरे दिन सुस्ती, थकावट व चिड़चिड़ापन रहता है। इन परिस्थितियों में व्यक्ति स्वयं तो बेचैन रहता ही है साथी सहयोगियों के साथ थी अच्छा व्यवहार नहीं कर पाता। इसका सीधा असर उसके काम-काज पर पड़ता है आखिर कई तरह से नुकसान उठाना पड़़ता है।
नींद में श्वास रुकने को कहते है एपनिया
उन्होंने बताया कि निद्रा के दौरान श्वास के रुकने को एपनिया कहा जाता है । जिन लोगों को खर्राटे आते हैं उनमें से 30 से 70 प्रतिशत लोगों को एपनिया हो सकता है, इसे हल्के से नहीं लेना चाहिए। क्योंकि नींद में खर्राटे जिन्हें हम मामूली समझते हैं कई गंभीर रोगों के जन्मदाता होते हैं। मसलन डायबिटीज, हृदय रोग, लकवा, सिरदर्द, उच्च रक्तचाप, मोटापा, किडनी रोग, लिवर रोग व मेटाबोलिक सिंड्रोम आदि इन्हीं खर्राटों की जड़ में छिपे रोग हैं। इसका सही समय पर निदान स्लीप एपनिया जनित हार्ट अटैक, व पक्षाघात को रोक सकता है।
बचाव के साधारण उपाय
-नियमित व्यायाम और प्राणायाम करें।
-समय पर भोजन करें।- सोने से कम से कम तीन घंटे पूर्व ही भोजन करें।
-पीठ के बल नहीं सोएं, सोते समय करवट लेकर ही सोएं।- सोते समय सिर को शरीर से लगभग 4 इंच ऊपर रखें।
-आहार-विहार पर समुचित ध्यान दें।-चिकित्सक से नियमित जांच एवं परामर्श लें।
Published on:
21 Mar 2022 01:53 am
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
