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कोरोना पीडि़त रोगी की अफवाह से मची खलबली

जुकाम-खांसी की मरीज को अस्पताल में किया गया था भर्ती, चिकित्सक ने रोगी पर्ची में ‘कोरोना नहीं’ लिखा था,जिसे समझ नहीं पाए नर्सिंगकर्मी,वार्ड छोड़-छोडक़र निकलने लगे भर्ती रोगी,समझाइश पर गलत फहमी हुई दूर

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कोरोना पीडि़त रोगी की अफवाह से मची खलबली

हिण्डौनसिटी के राजकीय अस्पताल में भर्ती खांसी-जुकाम से पीडि़त रोगी।

हिण्डौनसिटी (करौली). कोरोना संक्रमित रोग को लेकर लोगों में कितना भय है। साथ में चिकित्सा विभाग पर दबाव भी है। इसकी बानगी शनिवार को एक अफवाह से देखने को मिली। उपखंड मुख्यालय स्थित राजकीय चिकित्सालय में कोरोना संक्रमित महिला मरीज के भर्ती होने की अफवाह मात्र से अस्पताल प्रशासन ‘को-रोना’ आ गया।

चिकित्सक से लेकर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी तक के हाथ-पांव फूल गए। अस्पताल के मेडिकल वार्ड में मीडियाकर्मियों का जमावड़ा लग गया। विशेष बात यह रही कि वार्ड में भर्ती अन्य रोगी भी अफवाह के चलते जुकाम-खांसी की सामान्य महिला रोगी से दूरी बनाने के लिए वार्ड से निकलने लगे। बाद में चिकित्सकों की समझाइश के बाद भर्ती रोगियों ने राहत की सांस ली।

...और मान लिया कोरोना संक्रमित रोगी

सूत्रों के अनुसार सूरौठ क्षेत्र के मिल्कीपुरा निवासी तेजो देवी (४०) पत्नी रामेश्वर जाटव को करीब १० दिन से जुकाम-खांसी और बुखार होने पर परिजन राजकीय चिकित्सालय लेकर आए थे। यहां डॉ. आशीष शर्मा ने रोगी पर्ची पर अंग्रेजी में ‘कोरोना संक्रमित नहीं’ लिखकर महिला को मेडिकल वार्ड में भर्ती कर दिया। रोगी पर्ची के शब्दों को कुछ नर्सिंगकर्मी समझ नहीं पाए और महिला रोगी को कोरोना संक्रमित मान लिया।

फिर क्या था यह अफवाह कुछ ही देर में पूरे शहर में फैल गई। इससे अस्पताल प्रशासन में भी हडक़ंप मच गया। इसके बाद पीएमओ डॉ. नमोनारायण मीना के निर्देश पर रोगी को भर्ती करने वाले डॉ. आशीष शर्मा वार्ड में पहुंचे। नर्सिंगकर्मियों के साथ ही रोगियों की गलत फहमी को दूर किया।

नहीं मिल रहे मास्क, भटक रहे रोगी और परिजन

राजकीय चिकित्सालय में संक्रमण से बचाव की एहतियात के लिए मास्क नहीं मिल रहे है। ऐसे में रोगी व उनके परिजनों को भटकना पड़ रहा है। जबकि मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत मास्क नि:शुल्क वितरण के लिए उपलब्ध करना अनिवार्य है। अस्पताल में मास्क उपलब्ध नहीं होने से बाजार में साधारण मास्क के दाम भी दुगने तिगुने बढ़ गए हैं।