
Corruption-अजमेर सेन्ट्रल जेल में मचा रखी थी 'लूटÓ
मनीष कुमार सिंह
अजमेर. सेन्ट्रल जेल अजमेर(Ajmer central jail) में तैनात अधिकारी व कर्मचारियों ने सजायाफ्ता बंदियों से मिलीभगत कर जेल में लूट मचा रखी थी। बंदियों से सुविधा शुल्क वसूली के अलावा जिसे जहां से मौका मिला पैसा वसूलने की राह निकाल वहां से वसूली शुरू कर दी। यहां तक कि बंदियों के लिए जेल में आने वाले राशन सामग्री में जेल अधीक्षक, जेलर की शंह पर कमीशनखोरी व प्रतिबंधित सामान प्रवेश पर जमकर वसूली की गई।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से पेश आरोप पत्र में यह सब बताया गया है। इसके अनुसार बंदियों से वसूली के खेल में जेल प्रहरी संजयसिंह ने यहां सप्लाई होने वाली खाद्य सामग्री के सप्लायर फर्म व उनके स्टोर कीपर से सम्पर्क साध लिया। संजय ने स्टोर कीपर रामराज व विनोदकुमार के साथ मिलीभगत कर फर्म के खाली बिल पर हस्ताक्षर कराकर अपने पास रखता था। अपने हिसाब से हस्ताक्षरयुक्त खाली बिल पर सामग्री अंकित कर बिल वाउचर स्टॉक रजिस्टर में चढ़ा देता था। फिर स्टोर कीपर की मिलीभगत कर भुगतान उठा लेता था।
राशन सामग्री पर कमीशनखोरी
एसीबी की पड़ताल में सामने आया कि प्रहरी संजयसिंह जेल में आने वाली राशन सामग्री पर कमीशनखोरी करता था। उसकी सामग्री तुलाई की जिम्मेदारी थी। ऐसे में वह सजायाफ्ता बंदी दीपक उर्फ सन्नी के भाई प्रवेश उर्फ पोलू व सागर के साथ मिलकर प्रतिबंधित सामान राशन के कट्टों में डालता था,जिन्हें जेलर जसवंतसिंह जेल में दाखिल करवाता था। एसीबी की पड़ताल के अनुसार संजय जयपुर की फर्म रामगोपाल-भौरीलाल से कमीशन लेता था। यह रकम पुष्कर निवासी शैतान गुर्जर के जरिए यूपी के गाजियाबाद निवासी गविन्दरसिंह के खाते में ट्रांसफर कराता था। कमीशन की राशि भी लाखों में हैं। एसीबी ने गविन्दर सिंह के खिलाफ अनुसंधान लम्बित रखा है।
...हस्ताक्षर मेरे, इबारत नहीं
एसीबी के बयान में जयश्री कृष्णा, श्रीकृष्णा कम्युनिकेशन एवं जनरल स्टोर के मालिक देवनदास, रामचन्द्र ने बयानों में राशन सामग्री के बिल पर हस्ताक्षर तो अपने बताए लेकिन उस पर लिखी इबारत इपनी होने से इनकार कर दिया। एसीबी ने बिल और फर्म के मालिक के साइन, उस पर लिखी इबारत एफएसएल जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा है।
बिल-रजिस्टर में कांट-छांट
एसीबी ने जेल के रसोईघर व स्टार से जब्त किए स्टॉक रजिस्टर, बिल में कांट-छांट व अतिरिक्त पेज लगाकर सामग्री इन्द्राज व भुगतान किया जाना पाया है। जो हेरफेर की ओर इशारा करती है। एसीबी ने जेल अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।
जेलर था अहम कड़ी
प्रकरण में आरोपी जेलर जसवंतसिंह को जेल मेन्युअल के अनुसार व्यवस्थाओं की जांच, बंदियों की भोजन सामग्री की निगरानी, मोबाइल व प्रतिबंधित सामग्री को आने से रोकने की जिम्मेदारी थी, लेकिन उसके उलट जसवंत सिंह जेल प्रहरी केसाराम, संजयसिंह, प्रधान बाना के साथ मिलकर खाद्य सामग्री में प्रतिबंधित सामान को आराम से प्रवेश करता था। जेल में प्रतिबंधित सामग्री सजायाफ्ता बंदी शैतानसिंह, दीपक उर्फ सन्नी, रमेश उर्फ रामेश्वर के साथ मिलकर बंदियों को बेच रकम वसूला था।
Read more-मैडम तक सुविधा शुल्क पहुँचता था केसाराम
Published on:
26 Oct 2019 04:00 am
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