
चोरी की ज्वैलरी पर ऋण उठाकर मौज उड़ा रहे हैं।
केस-1
कोतवाली थाना पुलिस ने जनवरी में महाठग पाली के रतननगर निवासी सुरेश कुमार उर्फभैरिया पकड़ा। भैरिया छद्म नाम से पुलिस अफसर, राजनेता, मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी बनकर ज्वैलर्स को कॉल कर लाखों की ज्वैलरी उड़ा ले गया। ठग ने निजी फाइनेंस कम्पनी में गिरवी रख ऋण ले लेता है। अजमेर में गिरफ्तारी पर यह कबूला।
केस-३
अलवर गेट थाना पुलिस ने अप्रेल में धोलाभाटा में चोरी की वारदात में सांसी गिरोह के विशाल उर्फ गबरू, रॉकी और विशाल उर्फ दादू को पकड़ा। गिरोह ने चोरी की ज्वैलरी मार्टिण्डल ब्रिज के निकट स्थित एक निजी फाइनेंस कम्पनी में गिरवी रख दी। वारदात उजागर होने पर पुलिस ने माल बरामद किया।
केस-४
सिविल लाइंस थाना पुलिस ने फरवरी में नगीना बाग में हुई चोरी के मामले में सांसी गिरोह के विशाल, रॉकी और कालू को पकड़ा। गिरोह ने वारदात में नकदी व विदेशी मुद्रा के अलावा ज्वैलरी भी चुराई। चोरी की ज्वैलरी को गिरोह ने गिरवी रख अच्छी खासी रकम का इंतजाम कर लिया। पुलिस ने चोरी का माल बरामद कर लिया।
केस-५
अलवर गेट थाना पुलिस ने रेलवे अधिकारी के बंगले में चोरी की वारदात अंजाम देने वाले किशनगढ़ के कुख्यात चोर विकास जैन को गिरफ्तार किया। पुलिस पड़ताल में विकास ने वारदात कबूली, लेकिन सोने की ज्वैलरी निजी फायनेंस को गिरवी रख दी। पुलिस ने फायनेंस कम्पनी के लॉकर से चोरी का माल बरामद किया।
मनीष कुमार सिंह/अजमेर।
आमजन भले सोना गिरवी रखकर ऋण लेने से कतरा रहे हो, लेकिन चोर-उचक्कों को गोल्ड लोन स्कीम रास आ रही है। बीते एक साल में पुलिस के सामने दर्जनों ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें चोर चोरी की ज्वैलरी पर ऋण उठाकर मौज उड़ा रहे हैं। पड़ताल में सामने आया कि चोरी के माल पर उठाया गया ऋण चोरों के लिए सुरक्षित और फायदमेंद साबित हो रहा है।
चोरी की बढ़ती वारदातों और चोरी का माल खरीदने वालों पर पुलिस की सख्ती ने नकबजनों को नई राह दिखा दी। अधिकांश वारदात में चोरी का सोना चोर निजी फाइनेंस कम्पनी की तिजोरी में गिरवी रख रहे हैं। इससे चोरी का माल बाहर आने और पकड़े जाने का खतरा जहां सौ फीसदी खत्म हो जाता है, वहीं चोरी के माल की कीमत बाजार में ज्वैलर्स के यहां मिलने वाली कीमत से २० से ३० फीसदी तक अधिक मिल जाती है। ऐसे में अब चोर, नकबजन चोरी का माल ज्वैलर्स की दुकान में बेचने की बजाए गोल्ड लोन ले रहे हैं। बीते ७ माह में पुलिस जांच में कई एेसे मामले सामने आए, जिनके अनुसंधान में चोरी का माल फाइनेंस कम्पनी के लॉकर से बरामद किया गया।खरीददार-रखने वाला भी दोषी
पड़ताल में चोरी का माल निजी फायनेंस कम्पनी के लॉकर में रखने की बात सामने आने पर पुलिस ने कम्पनी प्रबंधन से बरामदगी के प्रयास किए तो शुरूआत में समझाना मुश्किल हुआ, लेकिन कानून का हवाला देते हुए चोरी का माल खरीदने व रखने वाला भी भादसं की धारा ४११ का दोषी बनाने पर फायनेंस कम्पनी के कारिंदों के होश उड़ गए।
पहले अदा नहीं दूसरा पास
अलवर गेट थानाप्रभारी हरिपाल सिंह की जांच में सामने आया कि कुख्यात चोर रॉकी ने पहले चोरी का माल गिरवी रख गोल्ड लोन ले लिया। अभी पहला ऋण चुकता हुआ नहीं उससे पहले फायनेंस कम्पनी ने दूसरी चोरी के माल पर ऋण पास कर दिया।८० फीसदी तक कीमत
पुलिस पड़ताल में सामने आया कि नकजन को चोरी की ज्वैलरी सुनार या सर्राफा बाजार में बेचने पर महज ४० से ५० फीसदी रकम में संतोष करना पड़ता था। इसमें भी सुनार अपना टांका काट लेते हैं, जबकि गोल्ड लोन जैसी स्कीम में उनको चोरी के माल का 70 से 85 फीसदी तक ऋण मिल जाता है। नकबजन को ऋण अदा नहीं करने पर भी चोरी के माल की अच्छी कीमत मिल जाती है।
यह करें उपाय
-गोल्ड लोन देने वाली कम्पनियां ग्राहक के आईडी की तस्दीक करें।
-ग्राहक की ओर से दिए जाने वाले गोल्ड का बिल या मालिकाना हक का साक्ष्य लेवें।
-ग्राहक का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जाए।
चोरी व लूट का माल प्राइवेट फाइनेंस कम्पनी के पास गिरवी रखकर ऋण उठाने के मामले सामने आए हैं। गोल्ड लोन देने वाली कम्पनियों का सर्वे कराकर उन्हें ऋण लेने वाले व्यक्ति के साथ उसके माल का भी बिल अवश्य लेवें। चोरी का माल बेचने वाले के साथ खरीददार भी उसका बराबर का दोषी माना जाता है।
राजेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक
Published on:
26 Aug 2017 10:35 am
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