
अजमेर जिले के खेड़ी गांव स्थित क्वॉरंटीन सेंटर में ठहरे प्रवासी मजदूर जो भीलवाड़ा की एक धागा फैक्ट्री में काम करते थे।
ajmer अजमेर. कोरोना के चलते लॉकडाउन में मजदूरों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। lockdown लॉकडाउन के दो से तीन चरण तक तो मजदूर जैसे-तैसे रुके रहे, लेकिन अब सब्र नहीं रहा। उसकी वजह कारखाना मालिकों ने जो पैसा दिया था। वह खर्च हो गया।
लॉकडाउन खुलने की उम्मीद में कई मजदूर घर नहीं गए, लेकिन चौथे चरण की घोषणा होते ही उनका धैर्य जवाब दे गया। lockdown लॉकडाउन में परिवहन साधन बंद रहे। ऐसे में कई श्रमिक पैदल ही रवाना हो गए तो बीच रास्ते पुलिस ने पकड़ कर क्वॉरंटीन में डाल दिया। कई श्रमिकों ने पुरानी साइकिलें खरीद ली,ताकि इसी से घर जा सके। यह प्रयास भी बेकार गए और साइकिलें बेचनी पड़ गई।
यह व्यथा भीलवाड़ा की एक धागा फैक्ट्री के श्रमिकों की है जो उत्तरप्रदेश, बिहार व झारखंड के निवासी हैं। इनमें से करीब 35 मजदूर भीलवाड़ा से साइकिल खरीद कर अपने घर के लिए निकले थे, लेकिन इन्हें बांदनवाड़ा समीप खेड़ी गांव में रोक लिया गया। अब उन्हें घर पहुंचने के लिए यह साइकिलें औने-पोने दामों में बेचनी पड़ी है।
भीलवाड़ा से निकले तो खेड़ी में पकड़ लिया
दरअसल lock down लॉकडाउन में बसें, ट्रेन आदि साधन बंद होने के कारण इन लोगों ने साइकिलें खरीद कर घर पहुंचने की योजना बनाई थी। श्रमिकों ने बताया कि उन्होंने भीलवाड़ा में 5 से 6 हजार रुपए कीमत में साइकिलें खरीदी थी। जैसे-तैसे वे खेड़ी तक पहुंच गए, लेकिन पुलिस ने उन्हें यहां रोक लिया। अब जेब में पैसे बिल्कुल नहीं बचे हैं। इसलिए साइकिलें दो हजार रुपए में बेच दी।
साइकिल तो यहीं छोडऩी पड़ेगी..
सूरत निवासी अरुण मिश्रा ने बताया कि साइकिल खरीदकर वह आगरा के लिए निकला था। हर जिले में अपनी व्यथा सुनाते हुए बांदनवाड़ा पहुंचा। यहां पुलिसकर्मियों ने रोक दिया। पुलिस ने कहा कि मजदूरों को व्यवस्थित भेजेंगे, साइकिल तो यहीं छोडऩी पड़ेगी। मजबूरी में उन्हें ढाई हजार में साइकिल बेचनी पड़ी। अब उन्हें बस से जयपुर पहुंचाया जाएगा। यहां से श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आगे जाएंगे।
फैक्ट्री मालिक ने दिया धोखा
अजमेर जिले के खेड़ी में 35 लोगों में से 24 बिहार के हैं। 10 झारखंड तथा एक व्यक्ति उत्तरप्रदेश का है। इन मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन के चलते इनके पास बचा पैसा खत्म हो गया। फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। वहां के मालिक ने ना तो मजदूरी का पैसा दिया ना ही राशन-पानी की व्यवस्था की।
अजमेर से मजदूरों की रवानगी
वैसे केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से अजमेर जिला मुख्यालय से पिछले चार दिनों से प्रवासी श्रमिकों को स्पेशल ट्रेन के जरिए इनके घर भेजा जा रहा है। अब तक उत्तर प्रदेश, बिहार,पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र,गुजरात व आंध्रप्रदेश के लिए श्रमिकों की रवानगी की गई है। इससे पहले यह मजदूर जिले के विभिन्न स्थानों पर बनाए क्वॉरंटीन सेंटरों पर रहे। यात्री बसों के जरिए इनको अजमेर लाया गया। यहां श्रमिक स्पेशल ट्रेन के जरिए रवानगी जारी है। इससे पहले कोरोना जांच की जाती है।
Published on:
20 May 2020 01:40 am
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