
...कहने को सिक्सलेन, हालात फोरलेन जैसे
मनीष कुमार सिंह
ब्यावर(अजमेर). लामाना में सड़क हादसा हुए अभी 10 दिन ही बीते हैं। परिवहन विभाग और पुलिस ने एक दो दिन तो कार्रवाई की लेकिन उसके बाद हालात फिर वैसे ही बन गए हैं। सड़क किनारे वाहन मनमर्जी से खड़े किए जा रहे हैं। ओवरलोड वाहन भी धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। दुर्घटना के आंकड़ों को देखा जाए तो कोई ऐसा दिन नहीं जाता जब ब्यावर से किशनगढ़ के बीच कोई दुर्घटना ना होती हो। सफर के बीच दम तोड़ती जिंदगियों के लिए जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं। दुर्घटना कारित करने वाले वाहनचालक के खिलाफ फौरी कार्रवाई कर दी जाती है लेकिन इन हादसों को रोकने के लिए किए गए सार्थक प्रयासों की कमी साफ नजर आती है। कहने को राजमार्ग पर दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए यातायात पुलिस के इंटरसेप्टर,पेट्रोलिंग वाहनों की तैनाती है लेकिन ये वाहन सिर्फ कागजी साबित हो रहे हैं।
ब्यावर से किशनगढ़ के बीच सैकड़ों होटल-ढाबे और दर्जनों सड़क चौराहे हैं। जहां जब चाहे ट्रक-ट्रेलर चालक लापरवाही पूर्वक राजमार्ग की पहली लेन में ब्रेक लगाकर वाहन खड़ा कर देते है। ऐसे में पीछे से तेजगति में आने वाले वाहन ओवर टेक करने की स्थिति में पहली लेन में खड़े वाहन से टकरा जाते है। ऐसे में पहली व अंतिम लेने में खड़े वाहनों को हटाने का कभी प्रयास नहीं होता। न ही राजमार्ग पर दौड़ते वाहनों की गति सीमा पर नजर रखी जाती है। जबकि यातायात पुलिस के इंटरसेप्टर वाहन का काम वाहनों की रफ्तार नियंत्रण और राजमार्ग पर खड़े वाहनों को हटवाना है।
लगातार जा रही जान
केस-1
22 सितम्बर 2019 को मांगलियावास थाना क्षेत्र के लामाना गांव में गुजराती होटल के सामने फुटपाथ व पहली लेन पर खड़े ट्रेलर से एक निजी ऑपरेटर की बस टकरा गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि बस का एक तरफ का हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। दुर्घटना में 9 जनों की मौत हो गई जबकि बीस यात्री जख्मी हो गए।
केस-2
08 जुलाई 2018 को दौराई, अजमेर के निकट रोडवेज के पाली डिपो की बस डम्पर से टकरा गई। हादसे में 11 लोगों की जान चली गई जबकि 25 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा गलत दिशा में पहली लेन पर डम्पर के चलने से कारित हुआ।
यह हैं थाने
ब्यावर से किशनगढ़ राजमार्ग के 90 किमी. के दायरे में जिले के 7 पुलिसथाने की सीमा लगती है। इसमें ब्यावर सदर, मांगलियावास, आदर्शनगर, अलवरगेट, सिविल लाइन, गेगल व गांधीनगर(किशनगढ़) थाना शामिल है।
जयपुर एक, अजमेर नम्बर दो
सड़क हादसे में मौत के मामले में प्रदेश में अजमेर दो नम्बर पर है जबकि राजधानी जयपुर एक नम्बर पर है। अजमेर जिले में हर साल करीब 600 लोग सड़क दुघर्टना में काल का ग्रास बन जाते हैं। जबकि जयपुर में यह आंकड़ा करीब 1400 है। हालांकि साल 2018 में अजमेर में सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या में आंशिक कमी दर्ज की गई लेकिन हालात अब वैसे ही हंै।
नहीं है पार्किंग जोन
जानकारों का कहना है कि किशनगढ़ से ब्यावर तक के मार्ग पर एनएचएआई(राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण)की ओर से कोई पार्किंग जोन नहीं बनाया गया है। जहां वाहन चालक अपने वाहन को खड़ा कर सकंे। ऐसे हालात में ट्रक-ट्रेलर चालक राजमार्ग की पहली लेन व फुटपाथ पर ही वाहन खड़ा कर देते हैं।
एक्सपर्ट व्यू...
लेन में पार्किंग के लिए सब हैं जिम्मेदार
राजमार्ग पर ओवर स्पीड को नियंत्रण के लिए इंटरसेप्टर वाहन लगाए गए हंै। अक्सर देखने में आया कि वाहन निर्माता कम्पनी से वाहन की गति सीमा 180 किमी.प्रति घंटा पास होती है जबकि उसकी वास्तविक गति सीमा 80 से 100 किमी.प्रति घंटा ही होती है। राजमार्ग के फुटपाथ व पहली लेन पर खड़े होने वाले वाहनों के लिए याताायत पुलिस के साथ संबंधित थाना और परिवहन विभाग की सामूहिक जिम्मेदारी है। सबकी एक ही जिम्मेदारी है कि राजमार्ग पर वाहनों का दबाव कम हो ताकि दुर्घटनाएं ना हो।
जयसिंह, रिटायर्ड पुलिस उप अधीक्षक
इनका कहना है
अजमेर में तीन इंटरसेप्टर वाहन में से दो खराब हैं। एक से राजमार्ग क्षेत्र में वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण का काम किया जा रहा है। राजमार्ग पर अवैध तरीके से खड़े होने वाले वाहन को हटाने का काम पुलिस के साथ-साथ परिवहन विभाग और एनएचएआई की पेट्रोलिंग टीम का भी होता है। राजमार्ग पर वाहन निर्धारित पार्किंग जोन में ही खड़े किए जाने चाहिए।
कुंवर राष्ट्रदीप, एसपी अजमेर
Published on:
04 Oct 2019 11:35 am
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