
बौंली. सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली के बीच युवाओं में फास्ट फूड और जंक फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पिज्जा, बर्गर, मोमोज और पैक्ड फूड जैसे खाद्य पदार्थ अब खान-पान के साथ सोशल ट्रेंड का हिस्सा बनते जा रहे हैं। इसके चलते पारंपरिक और पौष्टिक भोजन से युवाओं की दूरी बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक जंक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल जैसी जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में संतुलित और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देना जरूरी है।
जैविक खेती से दिया स्वस्थ खान-पान का संदेश
क्षेत्र के डिडवाड़ी गांव निवासी एडवोकेट संतोष कुमार स्वामी ने जैविक खेती को अपनाकर लोगों को स्वस्थ खान-पान का संदेश दिया है। पेशे से अधिवक्ता स्वामी अपने खेतों में जैविक तरीके से खेती कर रहे हैं और रसायनमुक्त खाद्यान्न के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। स्वामी का कहना है कि युवाओं को जंक फूड के बढ़ते चलन से बचकर पारंपरिक खान-पान की ओर लौटना चाहिए। बाजरा, ज्वार, मक्का, हरी सब्जियां, छाछ और मौसमी फलों जैसे स्थानीय खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। उनका मानना है कि जैविक खेती और पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।
स्वामी ने किसानों से जैविक खेती के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और युवाओं से घर के ताजा व संतुलित भोजन को प्राथमिकता देने की अपील की। उनका संदेश है कि कुछ पल के स्वाद के बजाय दीर्घकालीन स्वास्थ्य को महत्व देना जरूरी है।
Updated on:
09 Aug 2026 06:00 am
Published on:
09 Aug 2026 06:00 am
