
रक्तिम तिवारी. उच्च और तकनीकी शिक्षा संस्थानों में अब विद्यार्थियों को 5 और 6जी तकनीक पढ़ाई जाएगी। इसके लिए 5 और 6जी तकनीक से जुड़े विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसे लेकर सूचना-प्रौद्योगिकी-संचार और शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं। साथ ही संस्थानों को दोनों प्रौद्योगिकी में पीएचडी को लेकर योजना भी तैयार करनी होगी।
5G-6G Education : 5 और 6जी से जुड़ी ऑप्टिकल कम्यूनिकेशन, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडकास्टिंग, आरएफ इंजीनियरिंग, टेलीकॉम मानकीकरण, वायरलेस सेल्युलर प्रौद्योगिकी, आइपीआर विषय शामिल होंगे। इन विषयों में पाठ्यक्रम के अलावा पीएचडी कार्यक्रम की शुरुआत हो सकेगी।
Engineering College : अजमेर के इंजीनियरिंग कॉलेज की पूर्व प्राचार्य उमाशंकर मोदानी कहतीं है कि 5 और 6जी को पाठ्यक्रम में शामिल करना जरूरी है। इससे विद्यार्थी अत्याधुनिक तकनीक से परिचित होंगे। ताकि विद्यार्थी जब कोर्स के बाद नौकरी अथवा व्यवसाय में जाएंगे तो चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे। इससे उद्योग क्षेत्र में भी बदलाव आएगा। संस्थान मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार कर सकेंगे।
फैक्ट फाइल: दक्षिण कोरिया में वर्ष 2028 तक 6जी नेटवर्क होगा। भारत में यह वर्ष 2030 तक तैयार होगा। 4,900 करोड़ से ज्यादा मार्केट होगा तथा 50 गुना ज्यादा नेटवर्क की रफ्तार होगी।
Published on:
15 Mar 2024 11:24 am
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